अस्मिता खेलो इंडिया विमेन योगासन लीग का भव्य आयोजन, योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला रहे मुख्य निर्णायक
Junaid Khan - शहडोल। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में खेल और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के खेल मंत्रालय और योगासन भारत द्वारा शासकीय मॉडल साइंस कॉलेज, रीवा में अस्मिता खेलो इंडिया विमेन योगासन सिटी लीग का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विंध्य क्षेत्र की महिला खिलाड़ियों ने अपनी योग कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शहडोल के योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला ने संभाली मुख्य निर्णायक की कमान प्रतियोगिता की निष्पक्षता और तकनीकी बारीकियों को परखने के लिए शहडोल के युवा राष्ट्रीय योगासन जज योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला को मुख्य निर्णायक (चीफ जज) नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में निर्णायक मंडल के सदस्य मुकेश तिवारी, सुशील कुशवाहा, शशांक सागर द्विवेदी, आदर्श पांडे एवं शुभम कुशवाहा ने प्रतिभागियों के कौशल का बारीकी से मूल्यांकन किया। विंध्य की बेटियों ने दिखाया दमखम। लीग में रीवा, सीधी, सतना, शहडोल और सिंगरौली जिलों की 10 वर्ष से लेकर 55 वर्ष तक की महिला खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया - पारंपरिक एकल, कलात्मक युगल, कलात्मक समूह। विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं ने कठिन आसनों और योग मुद्राओं के माध्यम से अपनी शारीरिक क्षमता और एकाग्रता का प्रदर्शन करते हुए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। जिसमें शहडोल से कलात्मक युगल में राशि मिश्रा एवं उजेफा बानो प्रथम रहीं। इनके कोच शिवेंद्र त्रिपाठी हैं। मध्यप्रदेश योगासन स्पोर्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा एवं सचिव दिनेश सिंह ठाकुर, संयुक्त सचिव गीता प्रसाद पांडे के मार्गदर्शन में रीवा योगासन स्पोर्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष रामाधार, उपाध्यक्ष रेनू शुक्ला, संयुक्त सचिव राजेश सिंह, कॉलेज के वरिष्ठ क्रीड़ा प्रभारी डॉ हबीब खान एवं ऑब्जर्वर मुकेश तिवारी के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के पूर्व विधायक के.पी. त्रिपाठी एवं सीएसपी राजीव पाठक मौजूद रहे एवं विशेष अतिथि डॉ इन्दिरा मिश्रा, सुशांत शेखर सिंह रहे।
इस सफल आयोजन ने न केवल महिला खिलाड़ियों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि विंध्य क्षेत्र में योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में नई पहचान भी दी।
