बुढार कोर्ट का सख्त फैसला बच्चों के सामने वारदात, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों ने खोली सच्चाई
Junaid Khan - शहडोल। जिले के बुढार क्षेत्र में हुई एक दिल दहला देने वाली हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायालय बुढार ने बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश सुनील कुमार अग्रवाल की अदालत ने हत्या के आरोपित गयाप्रसाद चर्मकार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला थाना बुढार में दर्ज अपराध क्रमांक 174/2024 से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपी ने अपनी ही पत्नी मीतिका की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी थी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।
बच्चों के सामने हुई खौफनाक वारदात
घटना उस समय की है जब मृतका मीतिका रात में अपने बच्चों के साथ घर में सो रही थी। इसी दौरान आरोपी गयाप्रसाद चर्मकार ने कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस दिल दहला देने वाली घटना को आरोपी के मासूम बच्चों ने अपनी आंखों से देखा, जो इस मामले के अहम प्रत्यक्षदर्शी भी बने।
पुलिस जांच में मिले पुख्ता सबूत
घटना के बाद पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया। विवेचना के दौरान आरोपी के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद की गई। इसके साथ ही आरोपी के खून से सने कपड़े भी जब्त किए गए, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में भी साक्ष्य आरोपी के खिलाफ पाए गए, जिससे पुलिस की जांच मजबूत हुई और केस की कड़ियां स्पष्ट होती चली गईं।
अदालत में मजबूत पैरवी, गवाह बने निर्णायक
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस और सुसंगत साक्ष्य प्रस्तुत किए। मृतका के पुत्रों सहित अन्य प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, डॉक्टर द्वारा दी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों ने घटना की पुष्टि कर दी।
अदालत ने सभी तथ्यों और प्रमाणों का गहन परीक्षण करते हुए आरोपी को दोषी पाया और उसे कड़ी सजा सुनाई।
न्यायालय का सख्त संदेश
इस फैसले को समाज में बढ़ते घरेलू हिंसा और हत्या जैसे अपराधों पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। निष्कर्ष: बुढार कोर्ट का यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद को मजबूत करता है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी कायम करता है।
