अफवाहों से दहशत में जनता,आम लोगों को बूंद-बूंद तेल खास लोगों को डिब्बों में सप्लाई का आरोप; प्रशासन के दावों पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों के बीच पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों ने शहडोल जिले में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। हालात ऐसे बने कि आम लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां भरवाने के लिए देर रात तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। गुरुवार रात जैतपुर स्थित एचपी पेट्रोल पंप पर स्थिति तब और बिगड़ गई जब तेल वितरण को लेकर दोहरे मापदंड और भेदभाव के आरोप सामने आए।
आम जनता बेहाल, रसूखदारों की चांदी
पंप पर मौजूद लोगों का आरोप है कि जहां आम वाहन चालकों को सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा था, वहीं कुछ खास लोगों को बड़े-बड़े डिब्बों में पेट्रोल भरकर दिया जा रहा था। इससे नाराज लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। लोगों का कहना है कि एक ओर आम आदमी को बूंद-बूंद तेल के लिए तरसाया गया, वहीं पर्दे के पीछे खुलेआम डिब्बा संस्कृति को बढ़ावा दिया गया, जिससे उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
तेल की लिमिट पर विवाद, पंप बना रणक्षेत्र प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,पंप प्रबंधन ने अचानक तेल वितरण पर लिमिट लागू कर दी। बाइक चालकों को मात्र 200 रुपए और चार पहिया वाहनों को 500 रुपए तक का ही पेट्रोल दिया जा रहा था। कार चालक आशीष शुक्ला ने बताया कि वे घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन जब उनकी बारी आई तो सिर्फ 500 रुपए का पेट्रोल देकर टाल दिया गया। लंबी दूरी का हवाला देने पर भी कर्मचारियों ने अधिक पेट्रोल देने से मना कर दिया।
इसी तरह बाइक चालक विक्की बारागाही ने भी आरोप लगाया कि 200 रुपए के पेट्रोल में आज के समय में वाहन कितनी दूर चलेगा, यह सोचने वाली बात है।
मैनेजर की मनमानी और कर्मचारियों की बदसलूकी के आरोप
लोगों ने पंप मैनेजर पर मनमानी करने और कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। आरोप है कि नियमों का हवाला देकर आम लोगों को रोका गया, लेकिन रसूखदारों को खुलेआम छूट दी गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ समय के लिए पंप परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया और हंगामे जैसे हालात बन गए।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग लगातार यह दावा कर रहे हैं कि जिले में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आ रही है।
यदि पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तो फिर पेट्रोल पंपों पर यह अफरा-तफरी और लिमिट क्यों लगाई जा रही है यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
रसोई गैस में भी कालाबाज़ारी के आरोप
मामला केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि रसोई गैस को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि बुक किए गए सिलेंडर हॉकर्स द्वारा अन्य लोगों को बेच दिए जा रहे हैं, जबकि असली उपभोक्ता इंतजार करते रह जाते हैं। उपभोक्ताओं ने बताया कि सिलेंडर की होम डिलीवरी व्यवस्था में भी भारी गड़बड़ी है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अफवाहों का बाजार गर्म, दहशत में जनता
सोशल मीडिया पर फैल रही युद्ध और तेल संकट की खबरों ने लोगों के मन में भविष्य को लेकर भय पैदा कर दिया है। इसी डर के चलते लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और गैस का स्टॉक करने में जुट गए हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। जैतपुर की घटना को भी इसी पैनिक बायिंग का परिणाम माना जा रहा है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पंप संचालकों और गैस एजेंसियों की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और बाजार में पारदर्शिता बनी रहे।
