ईदगाहों में उमड़ा जनसैलाब,गले मिलकर बांटी खुशियां,अमन, मोहब्बत और भाईचारे की मिसाल बना शहर
रमजान के रोजों के बाद खुशियों का सैलाब
Junaid Khan - शहडोल। मुकद्दस रमजान के पूरे तीस रोजों की इबादत, सब्र और बंदगी के बाद शनिवार को ईद-उल-फितर का त्योहार शहडोल में पूरे उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर का माहौल ईद की खुशबू से महक उठा। हर गली, हर मोहल्ले में “ईद मुबारक” की गूंज सुनाई दी और लोगों के चेहरों पर सुकून और खुशी साफ झलक रही थी।
ईदगाहों में उमड़ा आस्था का सागर
बुढार चौक स्थित ईदगाह सहित शहर की सभी प्रमुख ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोग एक साथ नमाज़ के लिए कतारबद्ध नजर आए। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने इस दृश्य को और भी खास बना दिया। हर कोई नए परिधानों में सजा-धजा, दिल में इबादत का जज़्बा लिए नमाज़ में शामिल हुआ।
इमाम का पैगाम—मोहब्बत ही असली ताकत
जामा मस्जिद के इमाम आरिफ साहब ने ईद की नमाज़ अदा कराई। नमाज़ के बाद अपने खुतबे में उन्होंने कहा कि ईद का असली संदेश आपसी प्रेम, भाईचारा और इंसानियत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज में एकता बनाए रखें, जरूरतमंदों की मदद करें और नफरत से दूर रहकर मोहब्बत को बढ़ावा दें।
अमन-चैन और तरक्की की गूंजती दुआएं
नमाज़ के दौरान हजारों हाथ एक साथ उठे और अल्लाह ताला से देश में अमन-शांति, भाईचारा, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं। खासतौर पर बीमारों की सेहतमंदी और समाज में सद्भाव कायम रहने की कामना की गई। पूरा ईदगाह “आमीन” की आवाज़ से गूंज उठा।
गले मिलकर दी मुबारकबाद, झलका भाईचारा
नमाज़ के बाद का दृश्य बेहद भावुक और दिल छू लेने वाला रहा। लोग एक-दूसरे से गले मिलते नजर आए और “ईद मुबारक” कहते हुए खुशियां बांटी। वर्षों पुरानी रंजिशें भी इस मौके पर खत्म होती दिखीं और हर ओर सिर्फ मोहब्बत का माहौल नजर आया।
बच्चों की ईद,खुशियों से भरी मुस्कान
ईद का सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में देखने को मिला। रंग-बिरंगे नए कपड़ों में सजे बच्चे खिलखिलाते हुए नजर आए। किसी के हाथ में गुब्बारे थे तो कोई ईदी पाने की खुशी में झूमता दिखा। बच्चों की मुस्कान ने ईद की रौनक को और भी बढ़ा दिया। सेवइयों की मिठास से महका हर घर नमाज़ के बाद लोगों ने अपने घरों में मेहमानों का स्वागत किया। सेवइयों, शीरखुरमा और विभिन्न पारंपरिक पकवानों की खुशबू से हर घर महक उठा। रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच मिठाइयों का दौर चलता रहा और ईदी देने-लेने की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई गई।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, प्रशासन रहा मुस्तैद
त्योहार को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। बुढार रोड और पाली रोड स्थित ईदगाहों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने लगातार निगरानी बनाए रखी, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
शहर बना गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल
ईद-उल-फितर के इस पावन मौके पर शहडोल ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। अलग-अलग समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को ईद की बधाई दी और आपसी भाईचारे को मजबूत किया। यह पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और इंसानियत का संदेश बनकर उभरा।


