जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: ‘सार्थक’ पर हाजिरी, मरीज इंतजार में बेहाल, डॉक्टर रहते गायब

सुबह से लाइन में खड़े मरीज, समय पर नहीं आते डॉक्टर, सफाई व्यवस्था बदहाल, दलालों की सक्रियता से बढ़ी परेशानी


Junaid Khan - शहडोल। जिला अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है। अस्पताल में समय पर ड्यूटी पर डॉक्टरों के नहीं पहुंचने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज घंटों डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन कई बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर सुबह आकर ‘सार्थक’ पोर्टल पर अपनी हाजिरी दर्ज करते हैं और उसके बाद अस्पताल से गायब हो जाते हैं। इसके बाद कई डॉक्टर लगभग 11 बजे के आसपास वापस आते हैं, जिससे मरीजों की लंबी कतारें और परेशानियां बढ़ जाती हैं। इस लापरवाही के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले कई मरीजों का कहना है कि अधिकांश डॉक्टरों की यह आदत बन चुकी है कि वे समय पर ओपीडी में नहीं बैठते। कई बार तो डॉक्टर अपने मोबाइल फोन में ही व्यस्त रहते हैं और मरीजों की ओर ध्यान नहीं देते, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है और मरीजों में आक्रोश बढ़ रहा है।

व्यवस्था चरमराई, मरीजों की हालत खराब

इस तरह की लचर व्यवस्था के कारण मरीजों को अपनी बीमारी सही तरीके से बताने का भी अवसर नहीं मिल पाता। कई बार उन्हें जल्दबाजी में पर्चा देकर दवा लिख दी जाती है, जिससे सही इलाज नहीं हो पाता। यह स्थिति जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सफाई व्यवस्था भी बनी बड़ी समस्या 

अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। वार्डों से लेकर शौचालय तक गंदगी का आलम देखा जा सकता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सफाई कर्मचारियों से सफाई करवाने के लिए भी कई बार दबाव बनाना पड़ता है। शौचालयों के आसपास गंदगी के कारण मरीजों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

दलालों की सक्रियता से बढ़ी मुश्किलें 

सूत्रों के अनुसार अस्पताल परिसर में कुछ दलाल भी सक्रिय हैं, जो मरीजों को विभिन्न जांच और सुविधाओं के नाम पर गुमराह करते हैं। ये दलाल पार्किंग और अन्य कर्मचारियों से संपर्क में रहकर मरीजों तक पहुंचते हैं और उनसे पैसे वसूलने का प्रयास करते हैं। इस तरह की गतिविधियां पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

जिला अस्पताल की इस बिगड़ती व्यवस्था को लेकर अब आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। खासकर कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

जरूरी है सख्त कार्रवाई

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो मरीजों के लिए जिला अस्पताल सुविधाओं के बजाय परेशानी का केंद्र बनता जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, बेहतर मॉनिटरिंग और सफाई व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। निष्कर्ष। जिला अस्पताल, जो आम जनता के भरोसे का केंद्र होना चाहिए, वहां की बदहाल व्यवस्था अब चिंता का विषय बन चुकी है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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