काला फीता बांधकर खदानों में उतरे श्रमिक,चार नए श्रम कोड के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

सोहागपुर एरिया में श्रमिक संगठनों का विरोध, केंद्र सरकार के कानूनों को बताया मजदूर विरोधी 


Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी चार नए श्रम कोड कानून के विरोध में एक अप्रैल को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सोहागपुर एरिया में श्रमिकों ने काला फीता बांधकर खदान में उतरते हुए विरोध दर्ज कराया। श्रमिक संगठनों ने एक अप्रैल को काला दिवस मनाते हुए जोरदार नारेबाजी की और इन कानूनों को श्रमिक विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग उठाई।

श्रमिक संगठनों का कहना है कि चार नए श्रम कोड में वेतन संहिता के अंतर्गत कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन और बोनस की गारंटी की बात कही गई है। वहीं सामाजिक सुरक्षा संहिता में गिग वर्कर और असंगठित क्षेत्र सहित सभी श्रमिकों के लिए पीएफ, पेंशन और ग्रेच्युटी के लाभ सुनिश्चित करने का प्रावधान है। इसके अलावा औद्योगिक संबंध संहिता में कंपनियों और कर्मचारियों के बीच विवादों का तेजी से निपटारा करने और औद्योगिक शांति बनाए रखने की बात कही गई है। साथ ही व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थिति संहिता में कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर वर्किंग कंडीशन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। दूसरी ओर श्रमिक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ये चार नए श्रम कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों से श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी, कार्य के घंटे प्रभावित होंगे और सामाजिक सुरक्षा में भी कटौती का खतरा बढ़ेगा। संगठनों ने यह भी कहा कि इन कानूनों के जरिए निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है और मजदूरों के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।

श्रमिक नेताओं का कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे श्रम कानूनों में बदलाव कर श्रमिकों को असुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन कानूनों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन सोहागपुर एरिया की ओपन कास्ट और अंडरग्राउंड कोयला खदानों में किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रमिकों ने एकजुटता दिखाते हुए काला फीता बांधकर काम किया। इस दौरान श्रमिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एक स्वर में आवाज बुलंद की। श्रमिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से और भी व्यापक विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे, ताकि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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