गृह मंत्री के ‘सरेंडर’ बयान पर भड़का आदिवासी समाज, शहडोल में भारत आदिवासी पार्टी का जोरदार हल्ला बोल

गृह मंत्री के ‘सरेंडर’ बयान पर भड़का आदिवासी समाज, शहडोल में भारत आदिवासी पार्टी का जोरदार हल्ला बोल 


Junaid Khan - शहडोल। भारतीय राजनीति में आदिवासियों की अस्मिता और स्वाभिमान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में दिए गए एक बयान को लेकर पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश फैल गया है। शहडोल में इस मुद्दे को लेकर भारत आदिवासी पार्टी ने तीखा विरोध दर्ज कराया और सड़कों से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक अपनी आवाज बुलंद की। सोमवार को शहडोल में भारत आदिवासी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आदिवासियों को “नक्सली” बताने वाली मानसिकता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दरअसल, मामला 30 मार्च 2026 का है, जब संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत को संबोधित करते हुए टिप्पणी की थी। इस बयान को आदिवासी समाज के सम्मान पर चोट मानते हुए भारत आदिवासी पार्टी ने इसे पूरे समुदाय का अपमान बताया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह मरावी ने तीखे शब्दों में कहा कि यह टिप्पणी केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि करोड़ों आदिवासियों को अपराधी और नक्सली साबित करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि जब भी आदिवासी अपने जल, जंगल और जमीन तथा 5वीं-6वीं अनुसूची के संवैधानिक अधिकारों की बात करते हैं, तो उन्हें दबाने और बदनाम करने की कोशिश की जाती है। ज्ञापन में मांग की गई है कि गृह मंत्री इस आपत्तिजनक बयान पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और संसद के रिकॉर्ड से इस टिप्पणी को तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी समुदाय के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाजी रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ताओं का तेवर काफी तल्ख नजर आया। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज ने हमेशा संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखा है, लेकिन यदि उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई तो इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों से लेकर संसद तक दिया जाएगा। क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि इस मामले में जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। सामाजिक संगठनों और युवाओं में भी इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी अस्मिता से जुड़े ऐसे मुद्दे आने वाले समय में बड़े जनांदोलन का रूप ले सकते हैं, जिससे प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

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