सीएमएचओ ने दिए निर्देश, संदिग्ध बैच पर कड़ी निगरानी; नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
Junaid Khan - शहडोल। जबलपुर जबलपुर में बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामोल सिरप के एक विशेष बैच के गुणवत्ता मानकों में फेल पाए जाने और उस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद शहडोल जिले का स्वास्थ्य महकमा भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्काल अलर्ट जारी करते हुए जिले के सभी शासकीय व निजी दवा भंडारों की जांच शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच में जिला अस्पताल सहित अन्य केंद्रों में उक्त नाम की दवा तो उपलब्ध पाई गई है, लेकिन उसका बैच नंबर जबलपुर में प्रतिबंधित किए गए बैच से अलग है। इसके बावजूद एहतियातन सभी संस्थानों को अपने-अपने स्टॉक का मिलान करने और संदिग्ध दवाओं को अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने बताया कि जैसे ही जबलपुर में पैरासिटामोल सिरप के एक बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठे, वैसे ही शहडोल में भी तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच टीमों को सक्रिय कर दिया गया। जिले के अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और दवा वितरण केंद्रों में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। सिविल सर्जन ने जानकारी दी कि जिस बैच पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसकी आपूर्ति फिलहाल शहडोल जिले में नहीं हुई है। फिर भी भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
डीन मेडिकल कॉलेज ने भी दी पुष्टि
डीन मेडिकल कॉलेज ने भी यह स्पष्ट किया है कि संस्थान में उपलब्ध सभी दवाओं की गुणवत्ता मानकों के अनुसार जांच की जा रही है और फिलहाल प्रतिबंधित बैच का कोई भी स्टॉक मौजूद नहीं है। इसके साथ ही औषधि निरीक्षण टीमों को लगातार बाजार में निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। आम जनता के लिए सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। यदि किसी के पास पैरासिटामोल पीडियाट्रिक सस्पेंशन (125 mg/5 ml) उपलब्ध है, तो उसका बैच नंबर अवश्य जांच लें। विशेष रूप से बैच नंबर 41507 को प्रतिबंधित बताया गया है, इसलिए इस बैच की दवा का उपयोग न करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इसकी जानकारी दें। जागरूकता ही सुरक्षा का उपाय। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। निष्कर्ष: जबलपुर की घटना के बाद शहडोल में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यह मामला दवा आपूर्ति प्रणाली और गुणवत्ता जांच की गंभीरता को भी उजागर करता है। समय रहते उठाए गए कदम भविष्य में किसी बड़े खतरे को टाल सकते हैं।
