अपनी आवाज बुलंद करते हुए महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सो. कर्मचारी संघ
Junaid Khan - शहडोल। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के निराकरण को लेकर एक ज्ञापन सीएमएचओ को दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि समयमान वेतन वृद्धि, एरियर एवं अन्य क्षेत्र में टीकाकरण ड्यूटी करने का 525 रुपए प्रति सत्र एवं कटे हुए वेतन का भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया गया है। कहा गया है कि कई बार विभाग को अवगत कराया गया है कि शीघ्र भुगतान कराया जाए लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि सार्थक के नाम पर केवल और केवल हमारा वेतन काटा जा रहा है, जबकि बराबर अपने ही कार्यक्षेत्र से सार्थक उपस्थिति लगाई जा रही है, उसके बाद भी वेतन काटा जा रहा है, जबकि विभाग के अन्य कैडर का वेतन नहीं काटा जा रहा है, ऐसा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि आपके द्वारा भी अनावश्यक रूप से मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि विभाग के सभी लक्ष्य और सभी राष्ट्रीय कार्य की पूर्ति हम लोगों द्वारा पूर्ण की जा रही है। यह ज्ञापन लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के साथ ही कई अधिकारियों को भेजा गया है।
मांगों को लेकर दिखा आक्रोश, सड़कों तक पहुंच सकता है आंदोलन
महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं, इसके बावजूद उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं
कार्यकर्ता, फिर भी उपेक्षा क्यों?
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण, सर्वे, जनजागरूकता और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इन महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोरोना काल से लेकर वर्तमान तक इन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है, लेकिन अब अपनी ही बुनियादी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
लगातार ज्ञापन और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना कई सवाल खड़े करता है। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करेगा, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा। कुल मिलाकर, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन अब सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि सम्मान, अधिकार और समान व्यवहार की लड़ाई बनता जा रहा है।
