HPC वेतन डकारने का संगीन आरोप
Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर एसईसीएल (SECL) सोहागपुर क्षेत्र के अंतर्गत संचालित शारदा ओसीएम (शारदा खुली खदान) इन दिनों ठेका कंपनी मेसर्स आरके अर्थ की घोर मजदूर विरोधी नीतियों और प्रशासनिक तानाशाही का अखाड़ा बन चुकी है। खदान से कोयला निकालने वाली इस रसूखदार कंपनी पर श्रमिकों का खून-पसीना चूसने और श्रम कानूनों को ठेंगे पर रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। कोलियरी ठेका मजदूर संघ के बैनर तले अब मजदूरों का आक्रोश सीधे खदान से निकलकर सड़क पर आ गया है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि कंपनी ने लगभग 150 अनुभवी और पुराने स्थानीय कर्मचारियों को दुर्भावनापूर्वक नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है और महज 30-32 कर्मचारियों के भरोसे पूरी खदान का संचालन कर रही है। कोल इंडिया की हाईपावर कमेटी (HPC) द्वारा निर्धारित न्यायसंगत वेतन देने के बजाय, ठेका कंपनी कौड़ियों के भाव पर मजदूरों से गुलामी करा रही है, जिसे लेकर खदान क्षेत्र में भारी औद्योगिक अशांति फैल गई है और मजदूर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं।
कालरी प्रबंधन की मूक सहमति और 'तारीख पर तारीख' का खेल
इस पूरे काले खेल में सबसे बड़ी संलिप्तता स्थानीय कालरी प्रबंधन की नजर आती है, जिसकी नाक के नीचे लिखित समझौतों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कोलियरी ठेका मजदूर संघ के महामंत्री कामाख्या नारायण राय ने प्रबंधन और ठेका कंपनी के इस नापाक गठजोड़ को बेनकाब करते हुए बताया कि पिछले एक साल में 5 अगस्त 2025, 19 दिसंबर 2025, 16 फरवरी 2026 और हाल ही में 29 मार्च 2026 को कालरी प्रबंधन की मौजूदगी में कई दौर की द्विपक्षीय वार्ताएं हुईं। लिखित समझौते भी हुए, लेकिन जब अमल की बारी आई तो ठेका कंपनी मुकर गई और प्रबंधन मूकदर्शक बना रहा। मजदूरों की जायज मांग है कि पूर्ववर्ती कंपनी (माइनसोल/सीबीएल) द्वारा वर्ष 2013 से देय एरियर सहित लीव का भुगतान किया जाए और ग्रेच्युटी राशि तुरंत जारी हो। लेकिन वर्ष 2021 से किए जा रहे आधे-अधूरे भुगतान का झांसा देकर मजदूरों के करोड़ों रुपये दबाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर एक बड़े वित्तीय और प्रशासनिक घोटाले की ओर इशारा करता है।
सुरक्षा नियमों की धज्जियां,मौत के साए में काम करने को मजबूर श्रमिक
वेतन चोरी के अलावा, मेसर्स आरके अर्थ कंपनी ने खदान की सुरक्षा को भी पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया है। खदान के भीतर महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS) के कड़े नियमों, माइंस एक्ट और कोल माइंस रूल्स का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। मजदूरों को आज तक पहचान पत्र (आई कार्ड) तक नसीब नहीं हुए हैं, जिससे उनकी ऑन-ड्यूटी मौजूदगी ही संदिग्ध बनी रहती है। हद तो यह है कि खदान जैसे जोखिमभरे क्षेत्र में काम करने वाले इन कामगारों के बीमा (इंश्योरेंस) की जानकारी तक छिपाई जा रही है। ऐसे में यदि खदान के भीतर कोई बड़ा हादसा या जनहानि होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या DGMS ने इस कंपनी को नियमों को ताक पर रखकर काम करने की खुली छूट दे रखी है? मजदूर संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि HPC वेतनमान लागू करने, पुराने कर्मचारियों की बहाली और DGMS सुरक्षा मानकों के पालन संबंधी आदेश की प्रतिलिपि तुरंत नहीं सौंपी गई, तो सोहागपुर क्षेत्र के पहिए पूरी तरह जाम कर दिए जाएंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी एसईसीएल प्रशासन और ठेका कंपनी की होगी।
