लक्ष्मी को 22 शराब दुकानों से हो रही अवैध ‘लक्ष्मी’ की प्राप्ति

शराब ठेकेदार शासन के नियमों को दिखा रहे ठेंगा,जनता से खुलेआम हो रही वसूली 


Junaid Khan - शहडोल। जिले की शराब दुकानों में इन दिनों रेट से ज्यादा वसूली का खेल खुलेआम चल रहा है। जिले की 29 देशी-विदेशी शराब दुकानों में से 22 दुकानों का संचालन इस वर्ष पेंगुइन ट्रेडकॉम प्राइवेट लिमिटेड के हाथों में पहुंचा है। शहडोल, बुढ़ार और ब्यौहारी क्षेत्र की अधिकांश दुकानें इसी कंपनी के अधीन हैं। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जहां शराब दुकानों का ठेका लगभग 121 करोड़ रुपये में गया था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर करीब 135 करोड़ 31 लाख 98 हजार 154 रुपये तक पहुंच गया। यानी करोड़ों की बढ़ोतरी के बाद अब उसका बोझ सीधे आम जनता की जेब पर डाला जा रहा है। आरोप है कि नया ठेका मिलते ही शराब दुकानों में नई रेट लिस्ट के नाम पर ग्राहकों से तय मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है। कई ग्राहकों का कहना है कि दुकानों पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, लेकिन शिकायत करने पर उन्हें जवाब तक नहीं दिया जाता। 

शासन का आदेश गायब, QR कोड कहीं नजर नहीं?

प्रदेश सरकार और आबकारी विभाग ने शराब दुकानों में पारदर्शिता लाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि प्रत्येक दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल से जनरेटेड QR कोड लगाया जाएगा,ताकि ग्राहक शराब की वास्तविक MSP और MRP जांच सकें। नियमों के अनुसार दुकानों में 3 से 5 प्रमुख स्थानों पर A-3 साइज के QR स्टिकर लगाए जाना अनिवार्य है, जिससे कोई भी ग्राहक अपने मोबाइल से स्कैन कर अधिकृत रेट सूची देख सके। लेकिन हकीकत यह है कि शहडोल जिले की अधिकांश शराब दुकानों में ऐसा कोई QR कोड नजर नहीं आता। सवाल यह उठता है कि आखिर आबकारी विभाग की निगरानी कहां है. क्या विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है या फिर सब कुछ सेटिंग के तहत चल रहा है?

नियमों की धज्जियां,अधिकारी मौन?

शासन के स्पष्ट नियम कहते हैं कि यदि कोई दुकानदार तय मूल्य से अधिक या कम पर शराब बेचता है, तो उसका लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है। बावजूद इसके जिले में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाता है, तो वे चुप्पी साध लेते हैं। आखिर क्यों.क्या करोड़ों के ठेके के पीछे “अवैध लक्ष्मी” का खेल चल रहा है? क्या जनता की जेब काटकर किसी और की तिजोरी भरी जा रही है.जनता पूछ रही कौन देगा जवाब. जब शासन ने पारदर्शिता के लिए QR कोड व्यवस्था लागू की, तो फिर शहडोल में इसका पालन क्यों नहीं हो रहा,यदि दुकानों में निर्धारित रेट से अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई.और सबसे बड़ा सवाल क्या आबकारी विभाग को यह सब दिखाई नहीं देता या फिर सब कुछ संरक्षण में चल रहा है.जिले में शराब दुकानों पर चल रहे इस कथित खेल ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब कार्रवाई और जवाब दोनों चाहती है।

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