प्रशासनिक सुस्ती पर भारी पड़ा 'मिनी ब्राजील' का जुनून: विचारपुर में फुटबॉल स्टेडियम का रास्ता साफ, ₹5 करोड़ के टेंडर जारी

प्रशासनिक सुस्ती पर भारी पड़ा 'मिनी ब्राजील' का जुनून: विचारपुर में फुटबॉल स्टेडियम का रास्ता साफ, ₹5 करोड़ के टेंडर जारी 


Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक फाइलों में दबे और सीमांकन की उलझनों में फंसे विचारपुर फुटबॉल स्टेडियम के प्रोजेक्ट को आखिरकार नई ऊर्जा मिल गई है। जिले के 'मिनी ब्राजील' के नाम से विख्यात विचारपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं निखारने के लिए जिस स्टेडियम का सपना देखा गया था, उसकी राह के रोड़े अब हट चुके हैं। पीआईयू (PIU) ने ₹5 करोड़ की लागत से होने वाले निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे अब इस खेल मैदान के जल्द ही मूर्त रूप लेने की उम्मीद जाग गई है।

खबर का असर: सीमांकन की त्रुटि में सुधार

लंबे समय से यह प्रोजेक्ट केवल इसलिए अधर में लटका था क्योंकि राजस्व और तकनीकी अमले ने भूमि सीमांकन में बड़ी लापरवाही बरती थी। पूर्व में हुई इस त्रुटि के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। स्थानीय स्तर पर लगातार उठ रही आवाजों और मीडिया के तीखे हस्तक्षेप के बाद, विभाग को अपनी गलती सुधारनी पड़ी। पीआईयू ने अब इस गड़बड़ी को दुरुस्त कर फाइल भोपाल मुख्यालय भेज दी है, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर खेलो इंडिया स्मॉल सेंटर के निर्माण की अंतिम बाधा दूर हो गई है।

व्यवस्थाओं की कमी से घुट रही थी प्रतिभा

विचारपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत के दम पर न केवल प्रदेश बल्कि सात समंदर पार विदेशों तक अपनी पहचान बनाई है। विडंबना यह है कि विश्व स्तर के खिलाड़ी देने वाली इस माटी में आज तक बुनियादी खेल सुविधाओं का अभाव था। संसाधनों की कमी और जर्जर मैदान के कारण युवा प्रतिभाओं के कौशल में वह निखार नहीं आ पा रहा था, जिसके वे हकदार हैं। स्टेडियम की मांग दशकों पुरानी थी, जिसे अब जाकर शासन ने गंभीरता से लिया है।

₹5 करोड़ का बजट: क्या-क्या बदलेगी तस्वीर?

प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार, ₹5 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि से विचारपुर में न केवल एक आधुनिक फुटबॉल ग्राउंड तैयार होगा, बल्कि इसे सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए बाउंड्रीवॉल, खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम, अत्याधुनिक पवेलियन और ऑफिशियल रूम का निर्माण भी किया जाएगा। पीआईयू के अधिकारियों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होते ही युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

अवैध कब्जेदारों और लापरवाह अधिकारियों को चुनौती

यह रिपोर्ट उन तमाम तत्वों के लिए एक सीधी चुनौती है, जिन्होंने सरकारी जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमा रखी थी या जो अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइलों को दबाए हुए थे। सीमांकन में हुई 'गलती' महज एक मानवीय त्रुटि थी या किसी को फायदा पहुंचाने की कोशिश, यह जांच का विषय है। लेकिन वर्तमान सक्रियता बताती है कि अब जनभावनाओं के आगे प्रशासन को झुकना ही पड़ा।

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