बटुरा से ब्यौहारी तक फैला अवैध डंपिंग का जाल; रीवा-भोपाल से दिल्ली तक पहुंच रही है करोड़ों की 'काली कमाई' की खेप
बटुरा-बकही में अशोक, बद्री और विजय का 'समानांतर शासन'; क्या प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है करोड़ों का अवैध सिंडिकेट?
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के बटुरा और बकही क्षेत्र में सक्रिय कोयला माफिया अब बेकाबू हो चुका है। जिस काले साम्राज्य की हम बात कर रहे थे, उसका चेहरा अब और भी खौफनाक हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, वे बताते हैं कि यह सिंडिकेट अब केवल फावड़ों और बेलचों से नहीं, बल्कि आधुनिक ब्लास्टिंग मशीनों से धरती का सीना चीरने की तैयारी कर चुका है। यह सीधे तौर पर प्रशासन को दी गई खुली चुनौती है कि कानून चाहे जो कर ले, हुकूमत हमारी ही चलेगी।'
रीवा, भोपाल से दिल्ली तक: करोड़ों के 'कमीशन' का गलियारा सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का आंकड़ा महज कुछ लाख नहीं, बल्कि प्रतिमाह कई करोड़ रुपये है। बताया जा रहा है कि इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा 'मैनेजमेंट' के नाम पर रीवा से होते हुए भोपाल और फिर दिल्ली के गलियारों तक पहुंचता है। यह संगठित भ्रष्टाचार का ऐसा पिरामिड है, जिसमें नीचे से ऊपर तक सबकी हथेलियां गर्म की जा रही हैं। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई केवल 'दिखावे' तक सीमित रह जाती है, क्योंकि इस सिंडिकेट के तार सत्ता के शीर्ष केंद्रों से जुड़े होने की चर्चा है।
जयसिंहनगर से ब्यौहारी: डंपिंग और रूट सेटिंग का 'मास्टर प्लान
कोयले की इस तस्करी का रूट मैप किसी पेशेवर लॉजिस्टिक कंपनी से कम नहीं है। सूत्रों का दावा है कि जैसीनगर से लेकर ब्यौहारी तक कोयले को जगह-जगह डंप किया जाता है। पहले छोटी गाड़ियों से कोयला इन गुप्त ठिकानों पर जमा होता है, और फिर मौका पाकर 'सेटिंग' के जरिए बड़े ट्रकों और हाइवा में लोड कर इसे प्रदेश की सीमाओं के बाहर भेज दिया जाता है। ब्यौहारी का इलाका इस समय माफियाओं के लिए सबसे सुरक्षित 'ट्रांजिट पॉइंट' बना हुआ है।
सेठ जी' की नई चाल: अब ब्लास्टिंग मशीन से होगा अवैध उत्खनन
इस खबर में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब पता चला कि सिंडिकेट के सर्वेसर्वा 'सेठ जी' ने अब काम को और तेज करने के लिए हैवी ब्लास्टिंग मशीनें मंगवा ली हैं। बिना किसी सुरक्षा मानक और बिना किसी सरकारी अनुमति के इन मशीनों का इस्तेमाल न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि यह आसपास के गांवों के अस्तित्व पर भी संकट है। अवैध रूप से मंगवाई गई ये मशीनें इस बात का प्रमाण हैं कि माफिया को अब कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। आखिर किसके संरक्षण में ये विस्फोटक और मशीनें शहडोल की सीमा में दाखिल हुईं?
काले साम्राज्य' के तीन मोहरे और अदृश्य आका
अशोक,बद्री और विजय तो केवल इस बिसात के मोहरे हैं, असली खिलाड़ी तो वे 'सेठ जी' हैं जो पर्दे के पीछे से करोड़ों के इस खेल को संचालित कर रहे हैं। अशोक की रणनीति, बद्री की दबंगई और विजय के नेटवर्क को अब इस 'ब्लास्टिंग मशीन' की ताकत मिल गई है। सिंडिकेट का दावा है कि उनके पास 'सिस्टम का कवच' है,जिसे कोई भेद नहीं सकता।
प्रशासन के लिए खुली चुनौती: क्या सिर्फ एफआईआर ही काफी है?
अब सवाल शहडोल प्रशासन की साख पर है। क्या प्रशासन को वाकई इस बात की खबर नहीं है कि जयसिंहनगर और ब्यौहारी में कोयला डंप हो रहा है? क्या खुफिया विभाग को इन ब्लास्टिंग मशीनों की भनक नहीं लगी? अगर लगी, तो अब तक 'सेठ जी' और उनके गुर्गों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? यह खबर उन अधिकारियों के चेहरे पर भी तमाचा है जो भ्रष्टाचार की चादर ओढ़कर चैन की नींद सो रहे हैं। विनाश की कगार पर शहडोल अगर इन ब्लास्टिंग मशीनों ने काम शुरू कर दिया, तो क्षेत्र का भू-गर्भ जल और पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। करोड़ों रुपये का राजस्व जो जनहित में लगना चाहिए था, वह चंद माफियाओं और उनके आकाओं की अय्याशी का साधन बन गया है। पत्रकार की कलम से: प्रशासन ध्यान दे, यह सिर्फ एक समाचार नहीं है, यह उस सुलगते ज्वालामुखी की चेतावनी है जो किसी भी दिन शहडोल की कानून-व्यवस्था को भस्म कर सकता है। समय रहते इन सफेदपोश भेड़ियों' पर प्रहार जरूरी है। सम्पादकीय नोट: यह रिपोर्ट उन साहसी सूत्रों के इनपुट्स पर आधारित है जो अपनी जान हथेली पर रखकर इस 'काले खेल' का पर्दाफाश कर रहे हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह 'अज्ञात' पर नहीं, बल्कि उन 'नामजद' चेहरों पर कार्रवाई करे जो इस पूरे सिंडिकेट के सूत्रधार हैं।सिंडिकेट के सूत्रधार हैं।
