नियमों को ठेंगा दिखा मौत बांट रहा बजरंग फिलिंग स्टेशन, सोशल मीडिया पर लाइव 'खिलावाड़' के बाद भी कुंभकरणी नींद में सोया प्रशासन

बुढ़ार-अमलाई मुख्य मार्ग पर धड़ल्ले से जारी है डिब्बों में डीजल का अवैध धंधा; रूंंगटा मोड़ के व्यस्त इलाके में बड़े हादसे को खुला आमंत्रण, खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल


Junaid Khan - शहडोल। बुढ़ार अमलाई एक तरफ जहां देश के सर्वोच्च स्तर से लेकर सूबे के मुखिया तक कानून व्यवस्था, पारदर्शिता और कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करने की दुहाई देते नहीं थकते, वहीं दूसरी ओर बुढ़ार-अमलाई मुख्य मार्ग पर स्थित 'बजरण फिलिंग स्टेशन' (इंडियन ऑयल) पर इन तमाम सरकारी दावों और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों को सरेआम पैरों तले रौंदा जा रहा है। अब तक जो काला खेल पर्दे के पीछे गुपचुप तरीके से चल रहा था, उसका एक जीवंत और रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो ने न केवल पेट्रोल पंप संचालक की मनमानी, रसूख और बेखौफ अंदाज की पोल पट्टी खोलकर रख दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को भी सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही इस जमीनी हकीकत ने साफ कर दिया है कि चंद रुपयों के मुनाफे के लिए यहाँ आम जनता की जिंदगी को दांव पर लगाया जा रहा है।

जितना मांगो, उतना डीजल हाजिर,सुरक्षा ताक पर 

वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के स्पष्ट आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम प्लास्टिक के डिब्बों, जरिकनों और प्रतिबंधित बर्तनों में धड़ल्ले से डीजल भरा जा रहा है। नियमों के मुताबिक पेट्रोल पंपों पर इस तरह खुले बर्तनों में ज्वलनशील पदार्थ देना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है, लेकिन यहाँ सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी डर या कानूनी खौफ के, 'जितना मांगो, उतना डीजल' डिब्बों में उड़ेला जा रहा है। यह वायरल वीडियो चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि इस पंप पर नियमों का पालन करवाना तो दूर, खुद संचालक की शह और मिलीभगत से इस अवैध काम को बेधड़क अंजाम दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर खुले बाजार में डीजल की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के एक बड़े नेटवर्क की ओर भी साफ इशारा कर रहा है, जिसे रसूखदार ताकतों का संरक्षण प्राप्त है।

हादसे को खुला निमंत्रण, फिर भी जिम्मेदार मौन क्यों?

सबसे संवेदनशील और डराने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल रूंंगटा मोड़ जैसे व्यस्त इलाके के मुख्य मार्ग पर चल रहा है, जहां दिन-रात वाहनों की भारी आवाजाही और आम जनता की मौजूदगी रहती है। ऐसे में खुले बर्तनों में अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ की यह धड़ल्ले से हो रही बिक्री किसी बड़े और भयावह हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है। यह लापरवाही सिर्फ नियमों का सामान्य उल्लंघन नहीं, बल्कि वहां आने-जाने वाले सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान से सीधा खिलवाड़ है। लेकिन सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि पुख्ता वीडियो और सबूत सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी क्यों नहीं टूट रही है? जनता अब खुलकर सवाल उठा रही है कि इस निरंकुश संचालक पर आखिर इतनी मेहरबानी क्यों बरती जा रही है? स्थानीय नागरिकों ने पुरजोर मांग की है कि इस वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन तत्काल इस रीढ़विहीन व्यवस्था पर हंटर चलाए, पंप को सील करे और संचालक के खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए जो जिले के अन्य मुनाफाखोरों के लिए नजीर बन सके।

कालाबाजारी और रसूख का गठजोड़?

स्थानीय सूत्रों की मानें तो खुले डिब्बों में इस तरह डीजल की सप्लाई केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि इसके पीछे डीजल की अवैध डंपिंग और ऊंचे दामों पर कालाबाजारी का एक बड़ा खेल काम कर रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप तो मचा है, लेकिन देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस 'रसूखदार' संचालक पर हाथ डालने की हिम्मत दिखाता है या फिर 'कागजी खानापूर्ति' कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?

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