स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरूरी .....
Junaid Khan - शहडोल। 23 मई 2026- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा द्वारा गर्मी से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी की गई। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ऐसे में समयानुसार आवश्यक उपाय अपनाकर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लू (हीट स्ट्रोक) शरीर की गंभीर अवस्था है, जिसमें शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और व्यक्ति भ्रम की स्थिति में आ सकता है। गंभीर स्थिति में किडनी प्रभावित हो सकती है तथा समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु का खतरा भी रहता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। छोटे बच्चों को ढंककर छायादार स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। सी.एम.एच.ओ. ने बताया कि गर्मी में अत्यधिक पसीना आने से त्वचा पर खुजली, एलर्जी एवं घमौरियों जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हीट रैशेज के लक्षणों में त्वचा पर छोटे गुलाबी या लाल दाने निकलना, जलन, खुजली एवं चुभन महसूस होना शामिल है। उन्होंने लोगों को ठंडे पानी एवं कूलर की सहायता से शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, ढीले सूती कपड़े पहनने तथा त्वचा को साफ एवं शुष्क रखने की सलाह दी। घर से बाहर निकलते समय छाता, तौलिया एवं पानी साथ रखने तथा शिकंजी, आम पना एवं अन्य तरल पेय पदार्थों का सेवन करने की बात कही गई। साथ ही दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई। निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) के संबंध में उन्होंने बताया कि शरीर में पानी की कमी होने पर कमजोरी, अधिक पसीना आना, मितली, उल्टी, चक्कर एवं बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें तथा इलेक्ट्रॉल, ओ.आर.एस. एवं फलों के रस का सेवन करें। उन्होंने कहा कि लू या तापघात की स्थिति में तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर उपचार कराना जरूरी है।
