धनपुरी नगरपालिका का क्रूर फरमान,कुछ लोगों के टैक्स बकाया की सज़ा पूरे वार्ड को

भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसाए सौ से अधिक परिवार


Junaid Khan - शहडोल। जिले के धनपुरी नगरपालिका प्रशासन की एक बेहद संवेदनहीन और तानाशाही पूर्ण कार्रवाई इन दिनों सुर्खियों में है,जिसने इस भीषण और तपती गर्मी के मौसम में इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। नगरपालिका प्रबंधन ने एक ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया है, जिसके तहत वार्ड क्रमांक 22 के कुछ गिने-चुने उपभोक्ताओं का जल शुल्क बकाया होने की आड़ में पूरे वार्ड की ही जलापूर्ति पूरी तरह ठप कर दी गई है। इस अमानवीय फैसले के कारण पिछले कई दिनों से पूरे वार्ड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। प्रशासनिक हठधर्मिता का आलम यह है कि सजा उन निर्दोष नागरिकों को भुगतनी पड़ रही है जो नियमित रूप से अपने टैक्स का भुगतान करते आ रहे हैं। इस झुलसती गर्मी में पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता को इस तरह से बंद करना सीधे तौर पर आम जनता के जीने के अधिकार पर कुठाराघात है, जिसने अब एक बड़े जन-आक्रोश का रूप ले लिया है। नगरपालिका द्वारा वार्ड नंबर 22 में पाइपलाइन विस्तारीकरण का कार्य कराया जा रहा था। इस नई पाइपलाइन को डालने के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने भारी लापरवाही बरतते हुए पुरानी पाइपलाइन के चालू कनेक्शनों को एक झटके में एक साथ काट दिया। बताया जा रहा है कि जिन उपभोक्ताओं पर नल का बकाया था,उनके कनेक्शन बंद करना तो प्रशासनिक स्तर पर तर्कसंगत हो सकता था, लेकिन इसकी आड़ में बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के पूरे वार्ड की पानी सप्लाई बंद कर देना पूरी तरह से नगरपालिका की प्रशासनिक विफलता और घोर लापरवाही को उजागर करता है। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के कारण वर्तमान में 100 से अधिक परिवार पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। छोटे-छोटे मासूम बच्चे, असहाय बुजुर्ग और महिलाएं इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जिससे स्थानीय जनता का गुस्सा अब नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि प्रभावित वार्डवासियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से पानी के टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है। जब भी वार्ड में पानी का टैंकर पहुंचता है, वहां स्थिति अनियंत्रित हो जाती है और पानी भरने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। इस भीषण किल्लत के बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए महिलाओं और स्थानीय नागरिकों में आपसी धक्का-मुक्की और झूमाझटकी आम बात हो चुकी है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। इस पूरे मामले में जब सहायक राजस्व निरीक्षक राम विशाल नापित से पक्ष लिया गया, तो उन्होंने पुरानी पाइपलाइन चोक होने और नई पाइपलाइन विस्तारीकरण के कारण संकट गहराने की बात कही, साथ ही यह भी दोहराया कि बकाया नल जल शुल्क जमा होने के बाद ही नियमित जलापूर्ति बहाल की जाएगी। प्रशासन का यह अड़ियल रवैया साफ तौर पर दर्शाता है कि उन्हें जनता की बुनियादी तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। फिलहाल, आक्रोशित वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की नियमित सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो वे प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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