खाकी की स्क्रिप्ट या खूनी सिंडिकेट का खेल?

राहुल-अतुल की संदिग्ध मौत पर ब्यौहारी में फूटा जन-आक्रोश


Junaid Khan - शहडोल। ब्यौहारी मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग अंतर्गत ब्यौहारी में कानून-व्यवस्था के इकबाल और खाकी की नीयत पर एक बार फिर ऐसा गहरा दाग लगा है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। ग्राम टिकही के भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष राहुल द्विवेदी और उनके साथी अतुल तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को ब्यौहारी पुलिस महज एक 'सड़क हादसा' बताकर ठंडे बस्ते में डालने पर तुली हुई है, जबकि जमीनी हकीकत और जनाक्रोश कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। क्षेत्र की सजग जनता और पीड़ित परिवार इसे सीधे तौर पर माफिया राज का खूनी खेल' और सोची-समझी साजिश के तहत किया गया कत्ल करार दे रहे हैं। पुलिसिया लीपापोती और टालमटोल के रवैये से भड़के अखिल भारतीय ब्राह्मण सेवा संस्थान सहित सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं ने आँखों व हाथों पर काली पट्टी बांधकर, मशालों और कैंडल मार्च के साथ जय स्तंभ चौक पर हुंकार भरी। इस आक्रोशित जनसैलाब ने सीधे तौर पर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच की मांग करते हुए प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

कत्ल की गहरी साजिश या सिर्फ एक्सीडेंट का ड्रामा? 07 दिन बाद भी ब्यौहारी थाने क्यों नहीं पहुंची संदेहास्पद गाड़ी?

जनता और परिजनों ने पुलिस की ढीली कार्यशैली और संदिग्ध जांच प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे और तीखे आरोप लगाए हैं। दोबारा हुए पोस्टमार्टम (PM) को 8 दिन बीत जाने के बाद भी आखिरी रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना और परिजनों को न सौंपना, खाकी की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल उस लग्जरी गाड़ी (CG 04 LF 3043) पर उठ रहा है, जिसे छत्तीसगढ़ के धमतरी से जब्त करने का दावा किया गया था। सवाल यह है कि घटना स्थल से 600 किलोमीटर दूर वह गाड़ी कैसे और किसके संरक्षण में पहुंच गई? और जब उसे जब्त कर लिया गया, तो घटना के 7 दिन बाद भी वह ब्यौहारी थाने की दहलीज तक क्यों नहीं लाई गई? मृतकों और मुख्य संदिग्धों के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) और लोकेशन को अब तक क्यों और किसके इशारे पर छुपाया जा रहा है? क्षेत्र में अवैध रेत, कोयला, शराब और मवेशी तस्करी के सिंडिकेट के खिलाफ लगातार बेखौफ होकर आवाज उठाने वाले जमीनी नेता राहुल द्विवेदी को रास्ते से हटाने के लिए क्या इस 'एक्सीडेंट' की पटकथा लिखी गई थी? बिना किसी ठोस वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के, पुलिस आखिर इतनी जल्दीबाजी में इसे साधारण सड़क दुर्घटना घोषित करने पर क्यों आमादा है?

माफिया से सांठगांठ का आरोप, जनप्रतिनिधियों की रहस्यमयी चुप्पी पर संगठन की दोटूक चेतावनी। ब्राह्मण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष उपाध्याय ने बेहद तीखे और कड़े लहजे में शासन-प्रशासन को ललकारते हुए कहा कि ब्यौहारी पुलिस निष्पक्ष जांच करने के बजाय असली गुनहगारों और पर्दे के पीछे बैठे सफेदपोश आकाओं को खुला संरक्षण दे रही है। सबसे ज्यादा शर्मनाक और रहस्यमयी चुप्पी क्षेत्र के उन जनप्रतिनिधियों की है, जो जनता के वोटों से चुनकर कुर्सियों पर बैठे हैं लेकिन इस जघन्य मामले पर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। आक्रोशित जनता और संगठनों ने तहसीलदार राजकुमार रावत के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री और डीजीपी (DGP) के नाम एक 5-सूत्रीय कड़ा मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा है। संगठन ने दोटूक और अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि इस मामले की तत्काल प्रभाव से सीबीआई जांच शुरू हो, लापरवाही बरतने वाले और मामले को दबाने वाले पुलिस अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाए, तथा पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए। यदि 7 दिनों के भीतर सीबीआई जांच की मांग मंजूर नहीं की गई, तो पूरा ब्यौहारी ब्लॉक अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा और इस उग्र आंदोलन व चक्काजाम की संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

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