प्रशासनिक ढोंग की पोल खोलती 'बस स्टैंड' की बदहाली,दावों की हवा हवाई, सालों से नहीं हुई पानी टंकी की सफाई

लाखों की लागत से लगा वाटर कूलर खुद अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू, जिम्मेदार अधिकारी बेखबर, क्या किसी बड़े जलजनित हादसे का इंतजार कर रहा है नगर पालिका प्रशासन?


Junaid Khan - शहडोल। हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का दंभ भरने वाले जिला प्रशासन और नगर पालिका के खोखले दावों की अगर जमीनी हकीकत देखनी हो, तो जिला मुख्यालय के मुख्य बस स्टैंड चले आइए। यहाँ यात्रियों और स्थानीय बस कर्मचारियों की प्यास बुझाने के लिए लाखों रुपए की भारी-भरकम सरकारी राशि से लगाया गया वाटर कूलर आज खुद अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। वाटर कूलर के चारों ओर पसरा बदबूदार माहौल, जर्जर हो चुकी दीवारें और चारों तरफ फैला कीचड़ इस कड़वी हकीकत की गवाही दे रहे हैं कि यहाँ आम जनता की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ करना प्रशासनिक नियति बन चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि ठीक वाटर कूलर के ऊपर रखी पानी की विशाल टंकी जब से स्थापित की गई है, तब से लेकर आज तक इसकी आंतरिक सफाई तक नहीं कराई गई। स्थानीय दुकानदारों और नियमित बस कर्मचारियों का साफ़ कहना है कि नगर पालिका ने कागजों पर तो सफाई के नाम पर लाखों के बिल ठिकाने लगा दिए, लेकिन हकीकत में यहाँ जंग, काई और गंदगी की परतें जमी हुई हैं,जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही की ओर इशारा करती हैं।

स्लोगन और नियम सिर्फ दीवारों पर,नीचे मच्छरों का साम्राज्य और जलजनित बीमारियों को खुला आमंत्रण

सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाटर कूलर के ठीक बगल में दीवारों पर लिखे गए आदर्श स्लोगन और नियम, प्रशासनिक ढोंग को सरेआम उजागर कर रहे हैं। एक तरफ जहां स्वच्छ भारत और स्वास्थ्य के बड़े-बड़े नारे लिखे हैं, वहीं दूसरी तरफ वाटर कूलर के ठीक नीचे दूषित पानी का भारी भराव और बजबजाता कीचड़ है। यह गंदा पानी न केवल मच्छरों को खुला निमंत्रण दे रहा है, बल्कि भीषण गर्मी के इस दौर में जलजनित (Waterborne) और संक्रामक बीमारियों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। बस स्टैंड जैसी अत्यधिक व्यस्त और संवेदनशील जगह पर, जहां हर दिन संभाग भर से हजारों मुसाफिरों, महिलाओं और बच्चों का आना-जाना होता है, वहां ऐसी जानलेवा लापरवाही सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ क्रूर मज़ाक है। सरकारी अनदेखी और बदइंतजामी की यह तस्वीर चीख-चीखकर बयां कर रही है कि जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए वाटर कूलर की मशीन पर जंग और काई की मोटी परतें सिर्फ व्यवस्था की नाकामी नहीं, बल्कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत और 'अवैध' ढुलमुल रवैए का नतीजा हैं।

सवालों के घेरे में जिम्मेदार, जनता के हलक को तर करने की जिम्मेदारी थी,अब मौन क्यों है अमला?

जनता के स्वास्थ्य को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन सफेदपोशों और लापरवाह अधिकारियों को 'जेके न्यूज' सीधे चुनौती देता है। जहां आम जनता, यात्रियों और दिन-रात मेहनत करने वाले बस कर्मचारियों के हलक को तर करने की बुनियादी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की थी, वहां का यह वीभत्स नजारा प्रशासनिक तंत्र की रीढ़हीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है। आखिर टंकी की सफाई के नाम पर आने वाला बजट किसकी जेब में जा रहा है? वाटर कूलर के रखरखाव का मेंटेनेंस फंड कहाँ गायब हो गया? इस गंभीर और अमानवीय लापरवाही पर अब तक आला अधिकारियों ने आंखें क्यों मूंद रखी हैं? इस तीखी रिपोर्ट के बाद अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया नगर पालिका अमला और जिला प्रशासन इस अवैध लापरवाही पर क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर हमेशा की तरह कागजी जांच का कोरम पूरा कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। जनता अब जवाब मांग रही है!

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