पूर्व में छपी खबर से हड़कंप, पर रसूखदारों ने जांच दबाने के लिए खेला 'शिकायती कार्ड'; बिना रेरा, रास्ता और अनुमति के बेचे जा रहे करोड़ों के अवैध प्लॉट
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के सबसे चर्चित और मलाईदार इलाके 'बड़ी भीट' में इन दिनों भू-माफियाओं का एक ऐसा संगठित खेल चल रहा है, जिसने न केवल सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगाया है, बल्कि समूचे प्रशासनिक तंत्र की साख पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पूर्व में इस अवैध प्लाटिंग के खेल को लेकर हुए खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप तो मचा, लेकिन जमीनी कार्रवाई सिफर रही। असर यह हुआ कि कार्रवाई से बचने और अपनी खाल बचाने के लिए भू-माफियाओं ने अब एक नया पैंतरा चल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित रसूखदार व्यक्ति द्वारा कथित रूप से झूठी शिकायतों, मनगढ़ंत कहानियों और भ्रामक जानकारियों का सहारा लेकर जिला प्रशासन को गुमराह करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब इस पूरे अवैध साम्राज्य का सच उजागर करने वाले सजग नागरिकों और समाजसेवी अभिषेक सोनी को ही निशाना बनाया जाने लगा। उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज कराई जा रही शिकायतों और रिपोर्टों को लेकर आज पूरे शहर के प्रबुद्ध जनों और आम जनता में तीखी प्रतिक्रिया है। लोग खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि जो भी इस महाघोटाले के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे रसूख के दम पर कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरे खेल का सबसे स्याह पहलू यह है कि खसरा नंबर 39 एवं खसरा नंबर 21 की बेशकीमती भूमि पर बिना किसी वैध रास्ते के, बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस के, बिना नगर पालिका की टीएंडसीपी (Town and Country Planning) अनुमति के और बिना रेरा (RERA) पंजीयन के प्लॉटों की धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त जारी है। यदि यह पूरी प्रक्रिया वैधानिक है, तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने से कतरा क्यों रहे हैं? सफेदपोशों के दबाव में क्या जिला राजस्व विभाग ने अपनी आंखें मूंद ली हैं? क्या नगर पालिका अवैध प्लाटिंग के इस फलते-फूलते कारोबार को मूकदर्शक बनकर संरक्षण दे रही है? सवाल यह भी है कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इन तथाकथित भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाने की हिम्मत दिखाएंगे, या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर सच को हमेशा की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
जनता रहे सावधान,गाढ़ी कमाई पर मंडरा रहा खतरा
अखबार अपने पाठकों और आम जनता को आगाह करता है कि यदि आप बड़ी भीट जैसे विवादित क्षेत्र में जमीन या प्लॉट खरीदने का मन बना रहे हैं, तो झांसे में आने से बचें। अपनी जीवनभर की पूंजी फंसाने से पहले संबंधित भूमि की पूरी राजस्व जांच, उसका स्वीकृत नक्शा, वैध रास्ता, कॉलोनाइजर अनुमति, नगर पालिका की लिखित स्वीकृति एवं रेरा पंजीयन की बारीकी से पड़ताल अवश्य कर लें। अन्यथा, भू-माफियाओं के इस मायाजाल में आपकी गाढ़ी कमाई हमेशा के लिए दफन हो सकती है। अब देखना यह है कि कानून का इकबाल बुलंद करने का दम भरने वाला प्रशासन इस खुली चुनौती को स्वीकार कर माफियाओं के इस अवैध साम्राज्य पर 'बुलडोजर' चलाता है या चुप्पी साधकर अपनी संलिप्तता पर मुहर लगाता है। चौतरफा घिरे 'भू-माफिया': अब कागजात दिखाने से क्यों भाग रहे पीछे? जब नीयत साफ हो तो कागजात छुपाए नहीं जाते। बड़ी भीट के खसरा नंबर 39 और 21 के स्वयंभू आकाओं के पास यदि सारे नियम-कायदे दुरुस्त हैं, तो वे संबंधित दस्तावेज जिला प्रशासन और जनता के सामने क्यों नहीं रखते? सच को दबाने के लिए भ्रामक शिकायतों का सहारा लेना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। 20 वर्षों से पत्रकारिता के मूल्यों को जीने वाले इस अखबार की पैनी नजर इस पूरे मामले के हर एक पहलू पर बनी हुई है, और जब तक न्याय नहीं होता, यह अभियान थमेगा नहीं।
