शासकीय दफ्तरों में धर्मनिरपेक्षता की धज्जियां उड़ाता आरटीओ का 'विवादित चैंबर

सरकारी संरक्षण में चल रहे खेल पर फूटा हिंदू संगठनों का गुस्सा 


Junaid Khan - शहडोल। भारतीय संविधान की आत्मा और शासकीय सेवा आचरण नियमों को ताक पर रखकर परिवहन विभाग के भीतर चल रही अवांछनीय गतिविधियों का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। हमारे समाचार पत्र द्वारा लगातार प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का ही यह बड़ा असर है कि परिवहन कार्यालय शहडोल में लंबे समय से दबाए गए इस पूरे कारनामे की कलई अब सरेआम खुल चुकी है। मामला सीधा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के मुख्य चैंबर से जुड़ा है, जहाँ धर्म विशेष के प्रचार-प्रसार और फंड संग्रह से संबंधित टीन का एक संदेहास्पद बॉक्स (डिब्बा) रखे जाने पर पूरे संभाग का माहौल गरमा गया है। जैसे ही इस पूरे कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ (जिसे बीती 21 तारीख की घटना बताई जा रही है), वैसे ही हिंदू राष्ट्रवाद और शासकीय मर्यादाओं की रक्षा के लिए तत्पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सीधे कमिश्नर की चौखट पर दस्तक देकर इस अवैध और अनैतिक गठजोड़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कमिश्नर को सौंपे गए कड़े शिकायती पत्र में संगठनों ने सीधे तौर पर आरटीओ प्रशासन और इस अवैध कृत्य को मौन सहमति देने वाले ज़िम्मेदार अधिकारियों को खुली चुनौती दी है। शिकायत में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि आरटीओ कार्यालय के भीतर जो कुछ भी चल रहा था, वह किसी भी शासकीय कार्यालय की निष्पक्षता, धर्मनिरपेक्षता तथा शासकीय सेवा आचरण नियमों के पूरी तरह विपरीत और वैधानिक तौर पर दंडनीय है। विवादित बॉक्स पर बाकायदा 'बराये इसाले सवाब, मरहूम हाजी इस्माईल, पुरानी बस्ती, कल्याणपुर रोड शहडोल' अंकित है, जिसके बारे में जानकारों का स्पष्ट कहना है कि इसका सीधा संबंध किसी मृत व्यक्ति के नाम पर धार्मिक उद्देश्य से कुछ समर्पित करने या प्रचारित करने से है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि एक अत्यंत संवेदनशील और सार्वजनिक सरकारी दफ्तर, जहाँ हर वर्ग का नागरिक अपने कार्यों के लिए पहुंचता है, उसे किसी एक विचारधारा या धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की धृष्टता आखिर किसके शह पर की गई? इस पूरे प्रशासनिक घपले और अराजकता पर हिंदूवादी संगठनों ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इस पूरे मामले की अत्यंत बारीकी और निष्पक्षता से जांच कराई जाए और दोषियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया जाए। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों पर कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे जिले और संभाग के भीतर व्यापक व उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी समस्त जवाबदेही स्थानीय प्रशासन की होगी। दूसरी तरफ, जब इस पूरे विवाद को लेकर आरटीओ शहडोल के मुख्य कर्ताधर्ता अनपा खान से उनका आधिकारिक पक्ष और प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो हमेशा की तरह अधिकारियों का फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही भेजे गए संदेशों का कोई जवाब मिला। अधिकारियों का यह रहस्यमयी मौन और सवालों से भागने की आदत खुद-ब-खुद यह बयां कर रही है कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा है, जिसे अब हमारा अखबार जनता की अदालत में बेनकाब करके ही दम लेगा।

शासकीय कुर्सियों पर बैठकर नियम तोड़ने वालों को खुली चुनौती

सरकारी दफ्तर जनता के टैक्स से चलते हैं, किसी की व्यक्तिगत जागीर या धार्मिक प्रचार के मैदान नहीं हैं। आरटीओ जैसे मलाईदार विभाग के मुख्य चैंबर में ऐसा होना सीधे तौर पर जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रही लापरवाही को दर्शाता है। अनपा खान का इस पूरे मामले पर फोन न उठाना और चुप्पी साध लेना यह साबित करता है कि तंत्र के भीतर बैठे लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। हमारे अखबार की पैनी नजर कमिश्नर की टेबल पर पड़ी इस फाइल पर टिकी हुई है। देखते हैं कि एक सप्ताह की इस डेडलाइन' में प्रशासन कार्रवाई की हिम्मत दिखाता है या फिर हमेशा की तरह लीपापोती का सहारा लेता है।

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