संभाग में पेट्रोल-डीजल पर 'लिमिट' का पहरा,दो पंप पूरी तरह ड्राई; जनता बेहाल

कंपनियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और एडवांस पेमेंट के फेर में थमी रफ्तार, जयस्तंभ और बुढ़ार रोड के पंपों पर लटका ताला, पड़ोसी जिलों में भी मचा हाहाकार 


Junaid Khan - शहडोल। संभाग क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत और लगातार बढ़ती मांग के बीच तेल कंपनियों के नए तुगलकी फरमानों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थामने के लिए कंपनियों ने अब ईंधन की बिक्री पर 'कड़ी लिमिट' लागू कर दी है। रिटेल आउटलेट्स से औद्योगिक और बड़े व्यावसायिक ग्राहकों को भारी मात्रा में चोरी-छिपे ईंधन बेचने पर भले ही सख्त रोक लगाकर ऑनलाइन मॉनिटरिंग का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मांग के अनुरूप आपूर्ति न होने से संभाग के कई पेट्रोल पंप पूरी तरह से ठप हो चुके हैं। शाहडोल मुख्यालय में रविवार को दो प्रमुख पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई रहे, जिसके कारण उपभोक्ताओं को बूंद-बूंद तेल के लिए भटकना पड़ा। स्टॉक पूरी तरह शून्य होने के कारण शहर का हृदय स्थल माने जाने वाले जयस्तंभ स्थित पेट्रोल पंप पूरी तरह बंद रहा, तो वहीं बुढ़ार रोड स्थित पेट्रोल पंप पर भी 'नो स्टॉक' का बोर्ड झूलता नजर आया। बीते एक माह के भीतर संभाग में कई बार ऐसे हालात निर्मित हो चुके हैं, जो स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण और मैनेजमेंट पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं।

उमरिया कलेक्टर का कड़ा एक्शन,एसेंशियल कमोडिटी एक्ट' के तहत कार्रवाई की चेतावनी, जमाखोरों और कालाबाजारियों में हड़कंप 

ईंधन के इस गहरे होते संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उमरिया जिला प्रशासन ने आखिरकार दखल दिया है। उमरिया कलेक्टर ने जिले में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष दंडात्मक निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेश के मुताबिक जिले में संचालित सभी पेट्रोल और डीजल पंपों के प्रोपराइटर, संचालक, मैनेजर और विक्रेताओं को अपने पंपों पर हर हाल में पर्याप्त मात्रा में ईंधन का रिजर्व स्टॉक बनाए रखना होगा, ताकि शासकीय वाहनों, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल तथा अन्य आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आदेश में यह साफ कर दिया गया है कि इस आरक्षित पेट्रोल एवं डीजल स्टॉक का विक्रय अथवा प्रदाय जिला प्रशासन की अनुमति के बिना कतई नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी पंप संचालक ने इस आदेश का उल्लंघन किया या कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिश की, तो उसके विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के तहत सीधे एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एडवांस पेमेंट का 'काला खेल'और नोजल लॉकिंग सिस्टम,पड़ोसी जिलों अनूपपुर, रीवा और मंडला तक फैला नेटवर्क

इस पूरे संकट के पीछे तेल कंपनियों और पंप संचालकों के बीच 'एडवांस पेमेंट' का एक बड़ा खेल भी सामने आ रहा है। संभाग के बड़े पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, इस समय कंपनियों को एडवांस पेमेंट देना अनिवार्य कर दिया गया है, और जो संचालक एडवांस में मोटी रकम ब्लॉक नहीं कर पा रहे हैं, उनकी सप्लाई तत्काल रोक दी जा रही है। इसी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। स्थिति इतनी विकट है कि अब 'नोजल ऑटो-लॉक' की नौबत आ गई है। नए नियमों के बाद एक साथ ज्यादा मात्रा में पेट्रोल या डीजल देने पर नोजल स्वतः बंद हो जाता है। अनूपपुर जिले के जैतहरी में तो स्थिति यह है कि एक बार में अधिकतम 1500 रुपये का ही पेट्रोल दिया जा रहा है, और अधिक डिमांड पर दूसरी बार नोजल खोलना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर पंप संचालकों ने मनमर्जी चलाते हुए दोपहिया वाहनों के लिए 200 टैक्सियों और कारों के लिए 500 से 1000 रुपये तक की सीमित बिक्री के बोर्ड टांग दिए हैं। शाहडोल के पड़ोसी जिले अनूपपुर में भी बीते दिनों तीन पेट्रोल पंप लगातार तीन दिन तक बंद रहे, जबकि छिंदवाड़ा, रीवा, मंडला और उमरिया जैसे कई अन्य जिलों में भी यही त्राहि-त्राहि मची हुई है। प्रशासन की इस सुस्ती और तेल कंपनियों की तानाशाही के खिलाफ अब जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।

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