पूर्व सर्वेयर की शिकायत पर सुपरवाइजर हटा, विवादित चेहरे को दोबारा कमान सौंपने पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन मुख्यालय शहडोल द्वारा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के गुणवत्ता नियंत्रण हेतु सर्वेयर एवं मैदानी जांच सर्वेयर उपलब्ध कराने का कार्यादेश आर. बी. एसोसिएशन ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड भोपाल को दिया गया था। कंपनी द्वारा शहडोल जिले के 29 गेहूं उपार्जन केंद्रों में सुपरवाइजर और सर्वेयरों की नियुक्ति की गई, लेकिन अब इन्हीं नियुक्तियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों और वायरल ऑडियो के आधार पर आरोप है कि कई उपार्जन केंद्रों में गुणवत्ता जांच के नाम पर किसानों और समितियों से अवैध वसूली का खेल चलाया जा रहा था। चर्चा है कि खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को पास कराने के बदले रकम तय की जाती थी और यह पैसा “नीचे से ऊपर तक” पहुंचाने की बात कथित ऑडियो में सुनाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ सर्वेयरों के बीच हुई बातचीत के ऑडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन ऑडियो में कथित तौर पर सुपरवाइजर द्वारा सर्वेयरों को समितियों से पैसों की मांग करने और खराब गेहूं को नियमों के विपरीत पास कराने के निर्देश दिए जाने की चर्चा सामने आई है। यदि वायरल ऑडियो की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला प्रदेश स्तर का बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला साबित हो सकता है।
शिकायत के बाद हटाया गया सुपरवाइजर
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब एक पूर्व सर्वेयर की शिकायत पर सुपरवाइजर शिवम गुप्ता को कथित लेन-देन और उगाही के आरोपों के चलते हटा दिया गया। हालांकि सवाल यहां भी खड़े हो रहे हैं कि कार्रवाई के बाद जिस शिवम अहिरवार को सुपरवाइजर बनाया गया, उस पर भी पहले कई गंभीर आरोप लग चुके थे और कंपनी द्वारा उसे पूर्व में हटाया भी जा चुका था। ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि आखिर विवादों में रहे लोगों को दोबारा जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है. क्या कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों की मेहनत पर डाका
प्रदेश सरकार किसानों को समर्थन मूल्य और पारदर्शी उपार्जन व्यवस्था का भरोसा देती है, लेकिन यदि गुणवत्ता जांच करने वाले ही भ्रष्टाचार में शामिल हो जाएं तो सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। कई किसानों का आरोप है कि सही गेहूं में भी कमी निकालकर दबाव बनाया जाता है, जबकि पैसे लेकर खराब गेहूं को पास कर दिया जाता है।
जांच की मांग तेज
अब जिले में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। सामाजिक संगठनों और किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वायरल ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाए तथा जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। यदि समय रहते इस भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी, तो समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाएगी। किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बेनकाब करना ही हमारा संकल्प है।
