पर्यटन के नाम पर खिलवाड़? बाणसागर बैक वाटर में सुरक्षा व्यवस्था फेल, जिम्मेदारी तय नहीं
Junaid Khan - शहडोल। जिले का चर्चित पर्यटन स्थल सरसी आईलैंड इन दिनों रोमांच का केंद्र जरूर बना हुआ है, लेकिन यहां की हकीकत किसी बड़े खतरे की घंटी बजा रही है। बाणसागर बैक वाटर के बीच बसे इस आईलैंड पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बाणसागर बैक वाटर स्थित सरसी आईलैंड पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर। आइलैंड पर कोई स्थायी रेस्क्यू टीम मौजूद नहीं। पुलिस के पास न नाव, न प्रशिक्षित तैराक आपदा में बड़ी मुश्किल। नजदीकी थाना करीब 10 किमी दूर, पहुंचने में लगेगा समय। तीन बोटिंग प्वाइंट इटमा (7 किमी), मार्कण्डेय (4 किमी), काढ़े (2-2.5 किमी) मैनेजमेंट के पास 5 नावें, लाइफ जैकेट अनिवार्य होने का दावा। नाव चालक ही तैराक, अलग से रेस्क्यू दल नहीं। एसडीईआरएफ टीम शहडोल में, मौके पर पहुंचने में देरी तय। हाल ही में बरगी डैम हादसे के बाद भी सुरक्षा इंतजाम सवालों में सरसी आईलैंड की खूबसूरती के बीच सबसे बड़ा खतरा यह है कि यहां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं है। यदि नाव हादसा होता है, तो शुरुआती “गोल्डन टाइम” में रेस्क्यू संभव नहीं दिखता, जिससे जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय पुलिस के पास खुद की नाव तक उपलब्ध नहीं है और न ही प्रशिक्षित तैराक मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी आपदा की स्थिति में राहत कार्य शुरू करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। आईलैंड तक पहुंचने के लिए इटमा, मार्कण्डेय और काढ़े जैसे तीन प्रमुख बोटिंग प्वाइंट हैं, लेकिन इन सभी से भी रेस्क्यू टीम को मौके तक पहुंचने में समय लगना तय है। वहीं, नजदीकी थाना करीब 10 किलोमीटर दूर होने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।
मैनेजमेंट की ओर से भले ही लाइफ जैकेट अनिवार्य होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर नाव चालक ही तैराक की भूमिका निभाते नजर आते हैं। अलग से कोई प्रशिक्षित रेस्क्यू दल नहीं होने से पूरे सिस्टम की पोल खुल रही है। बरगी डैम हादसे के बाद भी अगर सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरती, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता देने के बराबर है। बड़ा सवाल: पर्यटन स्थल पर सैलानियों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? अगर प्रशासन और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो सरसी आईलैंड की यह लापरवाही कभी भी दर्दनाक हादसे में बदल सकती है। और तब जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाएगा।
