विश्व थैलेसीमिया दिवस आज:दिशा वेलफेयर’ ने छेड़ी जागरूकता की मुहिम, रक्तदान शिविर व कार्यशाला का होगा आयोजन

हर 15 दिन में खून की बोतलों पर टिकी मासूमों की जिंदगी, थैलेसीमिया मुक्त भारत बनाने की उठी मांग


Junaid Khan - शहडोल। हर साल 08 मई को मनाया जाने वाला विश्व थैलेसीमिया दिवस इस बार भी समाज को एक गंभीर संदेश दे रहा है। थैलेसीमिया जैसी जानलेवा आनुवांशिक बीमारी से जूझ रहे हजारों बच्चों और उनके परिवारों की पीड़ा को सामने लाने तथा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दिशा वेलफेयर द्वारा रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से लालपुर में जनजागरूकता कार्यशाला एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, फील्ड वर्कर सहित बड़ी संख्या में आमजन की सहभागिता रहेगी।

थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों के लिए जिंदगी किसी संघर्ष से कम नहीं होती। शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बनने के कारण इन बच्चों को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। अस्पतालों और रक्त केंद्रों के बाहर अपनों की जिंदगी बचाने के लिए खून की व्यवस्था करते माता-पिता की बेबसी हर किसी को झकझोर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए महंगी दवाइयों और चिलेशन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह इलाज किसी पहाड़ से कम नहीं होता। कई परिवार इलाज के खर्च में पूरी तरह टूट जाते हैं, लेकिन अपने बच्चों की जिंदगी बचाने की जंग जारी रखते हैं। दिशा वेलफेयर ने इस अवसर पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग से “थैलेसीमिया मुक्त भारत” अभियान को मजबूती देने की मांग की है। संस्था का कहना है कि इलाज से बेहतर बचाव है और यदि विवाह पूर्व थैलेसीमिया जांच (HbA2 टेस्ट) अनिवार्य कर दी जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। संस्था ने यह भी मांग उठाई कि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में थैलेसीमिया जांच को अनिवार्य किया जाए तथा प्रत्येक जिले में विशेष थैलेसीमिया केंद्र स्थापित कर मरीजों को मुफ्त दवाइयां और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए। दिशा वेलफेयर के पदाधिकारियों ने समाज से अपील करते हुए कहा कि थैलेसीमिया के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अधिक से अधिक लोग रक्तदान करें, जागरूकता फैलाएं और इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं ताकि कोई भी बच्चा खून की कमी और लापरवाही के कारण जिंदगीभर दर्द सहने को मजबूर न हो।

कार्यक्रम में रक्तदान के महत्व, थैलेसीमिया की रोकथाम, समय पर जांच और जनजागरूकता पर विशेष चर्चा की जाएगी। संस्था ने आमजन से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

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