जयसिंहनगर में स्पंदना स्फूर्ति कंपनी की आड़ में महाफर्जीवाड़ा

किश्त के नाम पर 'सुमित दत्ता' ने बेसहारा महिला को ठगा, कंपनी ने झाड़ा पल्ला


Junaid Khan - शहडोल। जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत इन दिनों ऑनलाइन ठगों और फर्जी फाइनेंस कर्मियों का नेटवर्क इस कदर हावी हो चुका है कि आम और सीधे-साधे नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर सरेआम डाका डाला जा रहा है। ताजा सनसनीखेज मामला वार्ड क्रमांक 03 का है, जहाँ एक बेसहारा और सीधी-सादी महिला रेणुका गुप्ता इस संगठित फर्जीवाड़े का शिकार हो गईं। पीड़िता ने वर्ष 2024 में अपनी घरेलू जरूरतों के लिए 'स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल कंपनी' से लगभग ₹42,000 का लोन लिया था। एक ईमानदार कर्जदार की तरह वह समय पर अपनी किस्तों का भुगतान भी कर रही थी। इसी बीच कंपनी की साख पर बट्टा लगाते हुए उसके ही एक शातिर और कथित अधिकृत कर्मचारी सुमित दत्ता ने महिला की मजबूरी का फायदा उठाने की साजिश रची। आरोपी ने मोबाइल फोन के माध्यम से पीड़िता से संपर्क किया और किस्त जमा न होने का डर दिखाकर उस पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद भरोसे में आकर पीड़िता ने अलग-अलग किस्तों के रूप में कुल ₹16,500 की भारी-भरकम राशि आरोपी के बताए खाते में ट्रांसफर कर दी।

दफ्तर पहुंचते ही उड़े होश, कंपनी के रवैये ने खड़े किए बड़े सवाल 

ठगी का यह घिनौना खेल तब उजागर हुआ जब पीड़िता खुद तसल्ली के लिए स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल कंपनी के मुख्य कार्यालय पहुंची। वहाँ जब रेणुका ने अपने खाते की जांच कराई, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कंपनी के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में साफ कह दिया कि उनके द्वारा जमा की गई ₹16,500 की राशि कंपनी के आधिकारिक खाते में दर्ज ही नहीं हुई है। तब जाकर पीड़िता को समझ आया कि कंपनी की आड़ में बैठा वही सुमित दत्ता उनके साथ धोखाधड़ी कर पूरी रकम डकार चुका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसे गंभीर मामलों में कंपनियां अक्सर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती हैं, जिससे यह साफ होता है कि आंतरिक ऑडिट और कर्मचारियों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। न्याय के लिए दर-दर भटक रही इस बेसहारा महिला की लिखित शिकायत पर जयसिंहनगर थाना पुलिस ने आखिरकार एनसीआर (NCR) दर्ज कर मामले को जांच के घेरे में लिया है।

प्रशासन को खुली चुनौती कागजी जांच छोड़िए, इन आर्थिक भेड़ियों को जेल भेजिए

यह मामला सिर्फ एक महिला की ठगी का नहीं है, बल्कि यह जयसिंहनगर पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे उस समानांतर नेटवर्क की गवाही देता है जो ग्रामीण और भोले-भले इलाकों में सक्रिय है। पुलिस का यह कहना कि 'साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच के उपरांत कार्रवाई होगी', अपराधियों को भागने का पूरा मौका देता है। आखिर क्यों पुलिस इन डिजिटल डकैतों पर तत्काल कड़ा शिकंजा नहीं कसती? जयसिंहनगर में लगातार बढ़ रहे इन मामलों को देखते हुए पुलिस अब सजग नागरिक बनने की केवल औपचारिकता वाली अपील कर रही है कि 'फोन पर भुगतान न करें'। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब कंपनियां खुद ऐसे शातिर चेहरों को फील्ड में उतारती हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? यदि समय रहते इस सुमित दत्ता जैसे आर्थिक लुटेरों और फर्जी फाइनेंस कर्मियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक व रासुका जैसी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का इस लचर कानून व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।

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