अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही: मासूमों की सांसों पर सिस्टम का पहरा,भीषण गर्मी में सुलग रहा जिला अस्पताल का PICU वार्ड

अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही: मासूमों की सांसों पर सिस्टम का पहरा,भीषण गर्मी में सुलग रहा जिला अस्पताल का PICU वार्ड 


Junaid Khan - शहडोल। एक तरफ आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से संवेदनहीनता की चादर ओढ़े सोया हुआ है। अस्पताल के अति-संवेदनशील पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) और प्रसूति वार्ड में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मासूम बच्चे और प्रसूता महिलाएं इस समय भीषण गर्मी और उमस के नर्क में तड़पने को मजबूर हैं। मीडिया में मामला गरमाने और लगातार उठती आवाज के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप तो मचा है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है। प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन की नाक के नीचे चल रहे इस 'अवैध' ढर्रे और मेंटेनेंस के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े ने व्यवस्था को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है। गंभीर रूप से बीमार बच्चों के वार्डों में तकनीकी लापरवाही और कमीशनखोरी का यह आलम है कि बार-बार सुधार कार्य के नाम पर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है, मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही है।

चार में से तीन एसी बंद, टेक्नीशियनों की लापरवाही या प्रबंधन की शह पर चल रहा है 'अवैध' खेल? 

अस्पताल के भीतर का नजारा किसी यातना गृह से कम नहीं है। पीआईसीयू वार्ड, जहां केवल उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनकी हालत बेहद क्रिटिकल (अति गंभीर) होती है, वहां कुल चार एसी लगाए गए हैं। लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही की हद देखिए कि इन दिनों इनमें से सिर्फ एक ही एसी किसी तरह रेंग रहा है, बाकी के तीन एसी पूरी तरह कबाड़ हो चुके हैं। पिछले शुक्रवार को तो स्थिति इतनी बदतर हो गई थी कि चारों एसी ने एक साथ काम करना बंद कर दिया, जिससे वार्ड भट्टी की तरह तपने लगा। बार-बार कंप्रेशर खराब होने का बहाना बनाकर तकनीकी अमला और ठेकेदार अपनी जेबें भर रहे हैं। यह महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि मासूमों की जान के साथ खेला जा रहा एक 'अवैध' और आपराधिक खेल है, जिसमें सुधार कार्य के नाम पर आने वाले बजट का बंदरबांट किया जा रहा है। बार-बार सुधार के बावजूद एसी का बंद हो जाना सीधे तौर पर टेक्नीशियनों की घोर लापरवाही और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

प्रसूति और क्रिटिकल वार्डों में भी हांफ रही व्यवस्था, 15 कूलर की जगह सिर्फ 5 के भरोसे चल रहा काम

यही खौफनाक मंजर अस्पताल के प्रसूति वार्ड, आईसीयू, एमआईसीयू, बर्न वार्ड, एसएनसीयू और डायलिसिस यूनिट का भी है, जहां बिना एसी के मरीजों को एक पल भी नहीं रखा जाना चाहिए। वहां भी सरकारी मशीनरी पूरी तरह हांफ चुकी है। काम करने वाला स्टाफ खुद इस भीषण गर्मी से बेहाल और बेचैन है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अस्पताल के मेडिकल वार्ड और कॉरिडोर की बात करें तो यहां मरीजों को राहत देने के लिए कम से कम 15 कूलरों की सख्त आवश्यकता है। वार्ड इंचार्ज द्वारा इसकी लिखित मांग भी बहुत पहले की जा चुकी है, लेकिन प्रबंधन ने संवेदनहीनता की हद पार करते हुए केवल दो नए कूलर खरीदकर औपचारिकता पूरी कर ली। तीन पुराने और कबाड़ हो चुके कूलरों की मरम्म्मत करवाकर जैसे-तैसे पांच कूलरों से पूरे वार्ड को हांकने की कोशिश की जा रही है। फीमेल मेडिकल वार्ड सहित कई ऐसे संवेदनशील कोने हैं, जहां तीन से चार कूलरों की जरूरत है, लेकिन वहां महज एक कूलर के भरोसे मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

अस्पताल प्रबंधक पूजा सोनी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: 'सीधी बात' में दावों की खुली पोल

जब इस बदहाली को लेकर अस्पताल प्रबंधक पूजा सोनी से सीधे तीखे सवाल किए गए, तो उनके जवाबों ने प्रशासनिक ढीलेपन और हठधर्मिता को पूरी तरह उजागर कर दिया। जब उनसे सवाल किया गया कि पीआईसीयू के एसी क्यों खराब पड़े हैं?तो उन्होंने बेहद चलताऊ अंदाज में कहा कि "एक एसी बन गया है, बाकी का सुधार हो रहा है।" सवाल यह है कि भीषण गर्मी के इस दौर में सुधार कार्य का यह कछुआ चाल प्रोग्रेस रिपोर्ट किसके काम आएगी?) प्रसूति वार्ड की बदहाली पर जब पूछा गया कि "वहां भी यही हाल क्यों है?" तो जवाब मिला कि "कुछ जगहों पर पुराने एसी हैं जो काम नहीं कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला जवाब तब आया जब उनसे समाधान की दिशा में हो रहे प्रयासों पर पूछा गया, तो उन्होंने सारा ठीकरा दूसरों पर फोड़ते हुए कहा कि सिविल सर्जन से बात हुई है, नए एसी मंगाने के लिए कहा गया है।" साफ है कि जब तक नए एसी फाइलों से निकलकर दीवारों पर लगेंगे, तब तक इस भीषण गर्मी में न जाने कितने मासूमों की जान जोखिम में डाल दी जाएगी। इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की दरकार है।

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