प्रशासन के खुफिया तंत्र पर बड़ा सवाल,क्या जिले में सक्रिय हैं अवैध वसूली करने वाले ऐसे और भी सिंडिकेट?
Junaid Khan - शहडोल। जिले में गोरक्षा के पवित्र नाम को कलंकित कर अवैध वसूली और गुंडागर्दी का धंधा चलाने वाले एक शातिर गिरोह का कोतवाली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामला सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र (Intelligence Division) को खुली चुनौती दे रहा है कि आखिर कैसे कुछ रसूखदार और रंगे सियार 'गोरक्षक' बनकर सरेआम राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण इलाकों में समानांतर कानून चला रहे हैं? 22 जून 2026 की रात पांडवनगर निवासी 64 वर्षीय बुजुर्ग किसान नरेश्र्वर प्रसाद पनिका के साथ जो कुछ भी हुआ, वह रूह कंपा देने वाला है। अपनी खेती-किसानी के लिए तीन पालतू बैलों को पिकअप वाहन में लोड कराकर ग्राम सिलवारी (जिला अनूपपुर) भेज रहे बुजुर्ग को कार सवार बदमाशों ने घेर लिया। खुद को गोरक्षक बताकर मवेशी चोरी और कटाई का झूठा आरोप मढ़ा गया और सीधे 50 हजार रुपये की मोटी रकम की डिमांड कर दी गई। यह पूरी वारदात चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि जिले में गोरक्षा की आड़ में ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क पैर पसार चुका है, जिसे समय रहते कुचलना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
बंधक बनाकर अड़ना नदी के फार्म हाउस में खूनी तांडव, डंडे-रॉड से पीटा
जब स्वाभिमानी फरियादी नरेश्र्वर प्रसाद और उनके साथ मौजूद गरीब श्रमिकों ने इस नाजायज वसूली के आगे झुकने से मना किया, तो इन कथित गोरक्षकों का असली हिंसक चेहरा सामने आ गया। आरोपियों ने सरेराह डंडे, लोहे की रॉड और लात-घूसों से बुजुर्ग और मजदूरों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो उन्होंने पीड़ित और उनके साथियों को जबरन डरा-धमकाकर अपनी गाड़ी में बैठाया और अपहरण कर अड़ना नदी किनारे स्थित एक सुनसान फार्म हाउस में ले जाकर बंधक बना लिया। वहाँ रात के अंधेरे में पीड़ितों के साथ न सिर्फ खूनी तांडव खेला गया, बल्कि उनके पास मौजूद नकदी और मोबाइल फोन भी लूट लिए गए। इस दुस्साहसिक वारदात ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दीं कि कैसे अपराधी बेखौफ होकर अपहरण और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
एक्शन में कोतवाली पुलिस,दबोचे गए शहर के 'सफेदपोश' और शातिर गुर्गे
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की भनक लगते ही कोतवाली पुलिस ने तत्परता और पेशेवर कार्यकुशलता का परिचय दिया। मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए सुसंगत धाराओं में डकैती, अपहरण और मारपीट का अपराध पंजीकृत किया और महज कुछ ही घंटों के भीतर दबिश देकर तीनों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल चौंकाने वाली है, जिसमें शहर के पॉश इलाकों के नामी चेहरे शामिल हैं:
1.अनुज सिंह (उम्र 30 वर्ष), पिता राघवेंद्र प्रताप सिंह, निवासी- वार्ड क्रमांक 16, कमिश्नर बंगला के सामने, शहडोल।
2.आशुतोष चतुर्वेदी (उम्र 36 वर्ष), पिता जगदीश चतुर्वेदी, निवासी- वार्ड क्रमांक 07, एमपीईबी कार्यालय के पीछे, शहडोल।
3.राजेश उर्फ रजौले बैगा (उम्र 30 वर्ष), पिता कुंवारे बैगा, निवासी- हाथीडोल, थाना बुढार, जिला शहडोल।
कोतवाली पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने जहां पीड़ितों को न्याय का भरोसा दिलाया है, वहीं पुलिस की इस 'सिंघम' स्टाइल कार्रवाई की जनता जमकर तारीफ कर रही है। हालांकि, अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस पूरे रैकेट की तह तक जाकर इनके अन्य मददगारों और ऐसे ही सक्रिय दूसरे फर्जी संगठनों पर भी एनएसए (NSA) और जिला बदर जैसी कड़ी कार्रवाई का हंटर चलाता है या नहीं।
