बिरसामुंडा मेडिकल कॉलेज में करोड़ों फूँकने के बाद भी पसरी गंदगी,70 सफाईकर्मियों की फौज और ठेका कंपनी 'हाइट्स' की औपचारिकता के बीच भगवान भरोसे मरीज

300 कर्मचारियों के बजट पर डाका,इमरजेंसी से लेकर नेत्र वार्ड तक गुटखे की पीक के दाग और सीपेज से संक्रमण का बड़ा खतरा,खाली कमरों में चल रहे पंखे कर रहे बिजली का खुलेआम अपव्यय


Junaid Khan - शहडोल। शासकीय बिरसामुंडा चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) शहडोल इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर प्रशासनिक घपलेबाजी और घोर लापरवाही का जीता-जागता केंद्र बन चुका है। सरकार द्वारा हर महीने हाउस कीपिंग, वार्ड ब्वॉय, टेक्नीशियन और मेंटेनेंस सेक्शन के नाम पर पूरे 300 कर्मचारियों का भारी-भरकम बजट पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद भयावह है। अस्पताल की ठेका कंपनी 'हाइट्स' को विशेष रूप से सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 70 सफाईकर्मियों की भारी फौज की तैनाती का ठेका दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि अस्पताल के चप्पे-चप्पे पर केवल गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। इमरजेंसी यूनिट के समीप गेट से लेकर नेत्र रोग वार्ड के पीछे खिड़कियों से बाहर तक सीपेज का पानी लगातार टपक रहा है, जिससे चारों तरफ कचरा सड़ रहा है और गंभीर संक्रमण की आशंका के बीच बेबस मरीज और उनके परिजन यहां इलाज कराने को विवश हैं। इस महा-लापरवाही का आलम केवल गंदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी राजस्व और बिजली का भी खुलेआम अपव्यय किया जा रहा है। मेडिसिन वार्ड की स्थिति इतनी हैरान करने वाली है कि वहां एक भी मरीज मौजूद नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी दिन-रात दर्जनों पंखे धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे सरकारी बिजली की खुली बर्बादी हो रही है। दूसरी तरफ, भीषण गर्मी के इस दौर में मरीज बूंद-बूंद ठंडे पानी के लिए तरस रहे हैं। इमरजेंसी गेट से अंदर आंगन में स्थापित की गई वाटर कूलर मशीन सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई है, जहां नियमित रूप से ठंडे पानी की सप्लाई तक नहीं की जाती। मरीजों का साफ आरोप है कि ठेका कंपनी के रसूख और प्रशासनिक साठगांठ के चलते सफाई और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल कागजी औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जबकि ठेका कंपनी के कर्मचारी 'सौरभ' का दावा है कि व्यवस्था लगातार दुरुस्त की जा रही है, जो पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। इस पूरे मामले की गंभीरता और चौतरफा मिल रही शिकायतों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जीबी रामटेके ने अंततः अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्वीकार किया है कि सफाई और अस्पताल प्रबंधन में गंभीर खामियां और शिकायतें पाई गई हैं। डीन ने सख्त लहजे में कहा है कि जिम्मेदार ठेका फर्म 'हाइट्स' को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और विधिक व दंडात्मक आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 20 वर्षों से अधिक का मैदानी अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे पर डाका और मरीजों की जान से खिलवाड़ का मामला है। जब तक ऐसी निकम्मी ठेका कंपनियों के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होती और प्रशासनिक मॉनिटरिंग को कड़ा नहीं किया जाता, तब तक मेडिकल कॉलेज की यह दुर्दशा नहीं सुधरेगी। यह खबर न केवल अस्पताल प्रबंधन के गाल पर एक तमाचा है, बल्कि उन ठेकेदारों को भी सीधी चुनौती है जो काम के नाम पर सिर्फ मलाई चाट रहे हैं।

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