प्रशासनिक अनदेखी और औद्योगिक सुरक्षा दावों की खुली पोल,बिना सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण के मौत के कुएं में धकेले जा रहे हैं मजदूर
Junaid Khan - शहडोल। औद्योगिक क्षेत्र अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल (ओपीएम) प्रबंधन की निरंकुशता और श्रम नियमों को ठेंगे पर रखने की आत्मघाती नीति ने एक बार फिर एक गरीब परिवार के चिराग को बुझाने का घिनौना कृत्य किया है। मिल के सबसे संवेदनशील और बेहद जोखिमपूर्ण 'बॉयलर विभाग' में गुरुवार की सुबह उस वक्त एक भीषण और दिल दहला देने वाला औद्योगिक हादसा हो गया, जब लिकर लाइन का वाल्व संचालित करते समय अचानक वह ब्लास्ट हो गया। इसकी चपेट में आने से वहां तैनात एक मासूम ठेका मजदूर, विजय यादव, खौलते हुए लिकर (अत्यधिक गर्म रसायनिक तरल पदार्थ) से बुरी तरह झुलस गया। हादसे के बाद मिल परिसर में हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में सहकर्मियों ने लहूलुहान और चीखते हुए श्रमिक को मिल के अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी अत्यंत गंभीर और नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल शाहडोल जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। वर्तमान में श्रमिक की हालत चिंताजनक बनी हुई है, जो सीधे तौर पर मिल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।
सस्ते श्रम के नाम पर 'मौत का खेल,न ट्रेनिंग, न पीपीई किट; जिम्मेदार मौन
इस पूरे रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम ने ओपीएम प्रबंधन की कार्यप्रणाली और खोखली सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नंगा कर दिया है। मिल के भीतर कार्यरत श्रमिकों ने दबी जुबान और भारी आक्रोश के साथ आरोप लगाया है कि बॉयलर और लिकर लाइन जैसे अत्यधिक उच्च तापमान, संवेदनशील और जानलेवा क्षेत्रों में काम करने के लिए नियमानुसार विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी अनुभव अनिवार्य होता है। लेकिन प्रबंधन अपने चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में बिना किसी अनुभव के सीधे ठेका मजदूरों को इस 'मौत के कुएं' में झोंक रहा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि उच्च तापमान वाले इन खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को न तो अग्निरोधक कपड़े (फायरप्रूफ सूट) दिए जाते हैं, न फेस शील्ड और न ही हीट-रेसिस्टेंट दस्ताने जैसे आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) उपलब्ध कराए जाते हैं। मिल प्रशासन सुरक्षा मानकों के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है, जबकि धरातल पर मजदूर बिना ढाल के बारूद के ढेर पर काम करने को मजबूर हैं।
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की रहस्यमयी चुप्पी, क्या किसी बड़े ब्लास्ट का है इंतजार?
यह गंभीर हादसा केवल मिल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला प्रशासन, श्रम विभाग और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी एक बड़ा और कड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। क्षेत्र में चर्चा तेज है कि आखिर इन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर मिल के भीतर का औचक निरीक्षण क्यों नहीं करते? क्या इन अधिकारियों को मोटी साठगांठ के चलते मजदूरों की जान की कोई परवाह नहीं है? मिल के आक्रोशित श्रमिकों और कर्मचारी संगठनों ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग बुलंद कर दी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि हादसे के समय सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था या नहीं, और पीड़ित श्रमिक को आवश्यक संसाधन क्यों नहीं दिए गए, इसकी सूक्ष्मता से जांच कर दोषी अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। यदि प्रशासन ने इस बार भी मामले को दबाने का प्रयास किया, तो एक बड़ा जन-आक्रोश फूटने से कोई रोक नहीं पाएगा।
