जैतपुर में 70 लाख की महाचोरी,खाकी की सुस्ती से 'खाक' होने की कगार पर पीड़ित की जीवनभर की पूंजी, बेखौफ बदमाशों को किसका संरक्षण?
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे आम नागरिक की जीवनभर की कमाई पर खुलेआम डाका डाल रहे हैं, और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है। मामला जैतपुर थाना अंतर्गत ग्राम कोटरी का है, जहां बीती 17 और 18 मई 2026 की दरमियानी रात बदमाशों ने धावा बोलकर पीड़ित जगदीश प्रसाद बारी के सूने घर से 60 से 70 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषण और 1 लाख 20 हजार रुपये की नगदी पर साफ हाथ कर दिया। इतनी बड़ी और सनसनीखेज वारदात के कई दिन बीत जाने के बाद भी जैतपुर पुलिस अंधेरे में लाठियां भांज रही है। पुलिस की इस कछुआ चाल और टालमटोल वाले रवैये से तंग आकर आखिरकार बेबस पीड़ित को न्याय की आस में आईजी शहडोल रेंज के दफ्तर की चौखट पर माथा टेकना पड़ा। पीड़ित ने आईजी को लिखित आवेदन सौंपकर स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता की पोल खोली है और तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है। इस पूरी वारदात ने जैतपुर पुलिस की मुस्तैदी और रात्रिकालीन गश्त के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। पीड़ित जगदीश प्रसाद बारी का आरोप है कि घटना के बाद से वे लगातार थाने के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें जांच का खोखला आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। संतोषजनक जवाब न मिलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा रहा है कि क्या खाकी जानबूझकर शातिर अपराधियों को ढील दे रही है? चोरी गया सामान केवल धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि उस परिवार की पीढ़ियों की जमा-पूंजी और महिलाओं का पवित्र 'स्त्रीधन' था। आशंका जताई जा रही है कि यदि पुलिस ने इसी तरह सुस्ती दिखाई, तो शातिर अपराधी इस भारी-भरकम खेप को बाजार में ठिकाने लगा देंगे या गला देंगे, जिसके बाद रिकवरी नामुमकिन हो जाएगी। क्षेत्र में चर्चा आम है कि यदि इतने बड़े मामले में भी पुलिस का यही ढुलमुल रवैया रहा, तो आम जनता का कानून पर से विश्वास उठ जाएगा। अब देखना यह है कि शहडोल आईजी के दखल के बाद क्या जैतपुर पुलिस नींद से जागती है या फिर यह फाइल भी अन्य अनसुलझे मामलों की तरह ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएगी।
