शहडोल में खाकी के इकबाल को सरेराह चुनौती,अवैध वसूली' और गुंडागर्दी का नया हब बना इंदा चौक,क्या सो रही है कोतवाली पुलिस?

शहडोल में खाकी के इकबाल को सरेराह चुनौती,अवैध वसूली' और गुंडागर्दी का नया हब बना इंदा चौक,क्या सो रही है कोतवाली पुलिस? 


Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील इलाकों में शुमार 'इंदा चौक' अब आम नागरिकों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। यहाँ कानून व्यवस्था को धता बताते हुए सरेराह अवैध वसूली, रंगदारी और गुंडागर्दी का खुला खेल चल रहा है, जो सीधे तौर पर स्थानीय कोतवाली पुलिस की गश्त और मुस्तैदी पर करारा तमाचा है। ताजा सनसनीखेज मामला 24 जून की रात करीब 10:30 बजे का है, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। कट्ठी मोहल्ला निवासी विक्रम शर्मा जब अपनी पत्नी के धार्मिक व्रत के अनुष्ठान हेतु मोटरसाइकिल से फल-फूल खरीदने निकले थे, तब उन्हें क्या मालूम था कि मुख्य चौक पर कानून का खौफ खा चुकी अपराधियों की टोली उनका रास्ता रोककर खड़ी है। इंदा चौक पर घात लगाकर बैठे आदतन उपद्रवियों ऋषभ तिवारी, विकास उर्फ बासू लखेरा, शानू यादव और रोहित उर्फ कच्ची शाह ने न सिर्फ विक्रम को बीच सड़क पर जबरन रोका, बल्कि सरेआम शराब पीने के नाम पर 1000 रुपये की अवैध रंगदारी की मांग कर डाली। जब एक संभ्रांत नागरिक ने अपनी मेहनत की कमाई इन गुंडों को सौंपने से इनकार किया, तो इन बेखौफ अपराधियों ने मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दीं।

प्रशासन और खाकी को खुली चुनौती,दहशत में आम जनमानस 

रुपये न मिलने से बौखलाए चारों बदमाशों ने माँ-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए लाठी-डंडों, लात-घूंसों से विक्रम शर्मा पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस बर्बर मारपीट में पीड़ित के दाहिने हाथ, सीने, कनपटी और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। चीख-पुकार सुनकर जब पीड़ित का भाई विनोद शर्मा और स्थानीय निवासी विनोद राव मौके पर पहुंचे, तब कहीं जाकर हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो पाए। हालांकि, कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्परता दिखाई और विवेचना के दौरान दो आरोपियों—विकास उर्फ बासू लखेरा और रोहित उर्फ कच्ची शाह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन दो अन्य मुख्य आरोपी ऋषभ तिवारी और शानू यादव अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर खुलेआम घूम रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस की यह आंशिक कार्रवाई इन आदतन अपराधियों के हौसले पस्त कर पाएगी? सरेराह रंगदारी और शराबखोरी के लिए मासूम नागरिकों का खून बहाने वाले इन तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? शहर का प्रबुद्ध वर्ग अब सीधे तौर पर प्रशासन से जवाब मांग रहा है कि रात के वक्त मुख्य चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी सिर्फ कागजों तक ही क्यों सीमित है? जब तक फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और ऐसे अवैध ठिकानों पर पुलिस का डंडा नहीं चलता, तब तक आम जनता का सुरक्षा तंत्र पर भरोसा बहाल होना नामुमकिन है।

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