खाकी का मानवीय चेहरा,शहडोल यातायात प्रभारी की अनूठी पहल बनी पुलिस महकमे के लिए नज़ीर
Junaid Khan - शहडोल। अक्सर पुलिस विभाग की छवि सख्त और अनुशासन के कड़े दायरों में बंधी नजर आती है, लेकिन शहडोल में खाकी का एक ऐसा मानवीय और संवेदनशील चेहरा सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले का दिल जीत लिया है। जिला यातायात थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति सम्मान और आत्मीयता की एक नई लकीर खींच दी है। हाल ही में यातायात थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) प्रताप सिंह के सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह इसका जीवंत उदाहरण बना। इस गरिमामय और भव्य आयोजन ने न केवल विदा हो रहे अधिकारी की आंखों को नम किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि एक कुशल नेतृत्वकर्ता वही है जो अपने अमले को कर्मचारी नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा माने।
विदाई नहीं,गृहप्रवेश जैसा उत्सव,एएसआई प्रताप सिंह को मिली भावभीनी विदाई
यातायात थाने में आयोजित इस विशेष विदाई समारोह का माहौल किसी बड़े पारिवारिक उत्सव जैसा नजर आया। थाना प्रभारी संजय जायसवाल के नेतृत्व में समूचे स्टाफ ने एएसआई प्रताप सिंह के लंबे, बेदाग और समर्पित सेवाकाल को न केवल याद किया, बल्कि उनके योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें ढोल-धमाकों और पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदा किया। विदाई के इस भावुक क्षण में हर सहकर्मी की जुबां पर प्रताप सिंह के प्रति सम्मान था। प्रशासनिक हलकों में इस गरिमामय आयोजन की जमकर सराहना हो रही है, क्योंकि ऐसे आयोजन अमूमन पुलिस महकमे की व्यस्त जीवनशैली में दुर्लभ माने जाते हैं। परंपरा की निरंतरता,बुढ़ार से लेकर यातायात थाने तक कायम है सम्मान का 'संजय मॉडल' यह पहला मौका नहीं है जब संजय जायसवाल की संवेदनशीलता चर्चा का विषय बनी हो। इससे पहले जब वे बुढ़ार थाना प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, तब भी उन्होंने अपने स्टाफ के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया था। अपने अधीनस्थों के जन्मदिवस, स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण निजी और व्यावसायिक अवसरों पर भव्य कार्यक्रम आयोजित करना उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है। बुढ़ार से शुरू हुई यह यादगार और आत्मीय परंपरा आज शहडोल यातायात थाने में भी पूरी शिद्दत के साथ जारी है, जो अधिकारी की जमीनी और सहृदय सोच को दर्शाती है।
बढ़ता है मनोबल,प्रशासनिक तंत्र के लिए मिसाल बनी यह कार्यशैली
पुलिस की नौकरी 24 घंटे के तनाव और मानसिक दबाव से भरी होती है। ऐसे में यदि विभाग का मुखिया अपने सहकर्मियों के सुख-दुख में सीधे सहभागी बने, तो यह समूचे महकमे के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा देता है। संजय जायसवाल की इसी लीक से हटकर की जाने वाली कार्यप्रणाली को आज पुलिस विभाग में बेहद सराहनीय और अनुकरणीय माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के आत्मीय प्रयासों से न केवल आंतरिक अनुशासन मजबूत होता है, बल्कि फील्ड में काम करने वाले जवानों का अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण भी दोगुना हो जाता है। शहडोल यातायात प्रभारी की यह पहल आज मध्य प्रदेश पुलिस के अन्य थानों के लिए भी एक प्रेरक संदेश दे रही है।
