खाकी का इकबाल खत्म,सीधी थाना क्षेत्र में सरेआम पुलिस पर हमला,क्या शहडोल संभाग में अब गुंडे तय करेंगे कानून की सीमा?

चिरहेट में डायल 112 के आरक्षक का सिर फोड़ा, सरकारी काम रोकने और जान से मारने की धमकी देने वाले 5 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज, लेकिन बड़ा सवाल- जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा? 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने और पुलिस प्रशासन के इकबाल को सीधी चुनौती देने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। सीधी थाना क्षेत्र के चिरहेट गांव में कर्तव्य पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर सरेआम न केवल जानलेवा हमला किया गया, बल्कि खाकी वर्दी को सरेबाजार जलील करते हुए जमकर गाली-गलौज भी की गई। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों ने कानून का खौफ पूरी तरह ताक पर रखकर डायल 112 में तैनात आरक्षक सतीश सिंह का सिर फोड़ दिया। यह हमला सीधे तौर पर जिले की चरमराती कानून व्यवस्था और बेखौफ होते जा रहे असामाजिक तत्वों की उस मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें अब उन्हें पुलिसिया कार्रवाई का कोई डर नहीं रह गया है। कानून के रखवालों पर हुआ यह हमला प्रशासनिक मुस्तैदी और गश्त के दावों की पोल खोलता है।

साइकिल-मोटरसाइकिल भिड़ंत के बाद भड़की हिंसा, बीच-बचाव करने गई पुलिस को ही बना दिया निशाना

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,घटना की शुरुआत चिरहेट गांव में एक साइकिल और मोटरसाइकिल के बीच हुई सीधी भिड़ंत से हुई थी। इस सड़क हादसे में साइकिल सवार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर पहुंची और आरक्षक सतीश सिंह ने इंसानियत व कर्तव्य का परिचय देते हुए सबसे पहले घायल को इलाज के लिए अस्पताल रवाना किया। इसके बाद जब आरक्षक दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिल को जब्त कर वैधानिक कार्रवाई के लिए थाने ले जाने लगा, तभी वहां मौजूद कुछ दबंगों और कानून विरोधी तत्वों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने सरकारी कार्रवाई का विरोध करते हुए विवाद शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर मौजूद विपिन पांडे, सुदीप पांडे, ओमकार सेन, राजा नापित और नन्दू पनिका ने आरक्षक को घेर लिया। इन लोगों ने न सिर्फ शासकीय कार्य में शासकीय लोक सेवक को रोका, बल्कि बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए आरक्षक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं।

प्रशासन को खुली चुनौती, मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन क्या सलाखों के पीछे पहुंचेंगे खाकी पर हाथ उठाने वाले गुंडे? 

इस दुस्साहसिक वारदात की भनक लगते ही थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लहूलुहान आरक्षक को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। पीड़ित आरक्षक की शिकायत पर पुलिस ने चिरहेट निवासी पांचों नामजद आरोपियों विपिन पांडे, सुदीप पांडे, ओमकार सेन, राजा नापित और नन्दू पनिका के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक पर हमला करने, सरेआम गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने सहित अन्य कई गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है। लेकिन क्षेत्र का प्रबुद्ध वर्ग और पत्रकारिता जगत अब प्रशासन से यह तीखा सवाल पूछ रहा है कि आखिर इन अपराधियों में कानून का इतना दुस्साहस कहां से आया? यदि ड्यूटी पर तैनात वर्दीधारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाली आम जनता इन गुंडों के भरोसे कैसे रहेगी? अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ क्या नजीर बनने वाली दंडात्मक कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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