महा-लापरवाही,04 साल से अंधेरे' में नवलपुर, ठेका कंपनी की मनमानी और बिजली विभाग की 'रहस्यमयी' खामोशी पर उठे गंभीर सवाल
Junaid Khan - शहडोल। गुणवत्तायुक्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावों की हवा निकालते हुए बिजली विभाग और एक रसूखदार ठेका कंपनी के गठजोड़ ने नवलपुर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। नवलपुर में स्वीकृत हुआ विद्युत सब स्टेशन निर्माण कार्य चार वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक अधूरा पड़ा है। हैरत की बात यह है कि इसी परियोजना के तहत लालपुर और अमझोर में शुरू हुए सब स्टेशनों का काम निर्धारित समय-सीमा के भीतर न केवल पूरा हो गया, बल्कि वहां बिजली आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। लेकिन नवलपुर में ठेका कंपनी की घोर लापरवाही, लेट-लतीफी और उस पर बिजली विभाग के आला अधिकारियों की 'रहस्यमयी चुप्पी' साफ इशारा करती है कि इस कछुआ रफ्तार काम के पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक घालमेल और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। विभागीय उदासीनता का खामियाजा आज क्षेत्र के हजारों निर्दोष ग्रामीणों को कड़कड़ाती धूप, भीषण उमस और अंधेरे में रहकर भुगतना पड़ रहा है।
लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग का टॉर्चर, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
नवलपुर क्षेत्र के ग्रामीणों का जनजीवन इस समय पूरी तरह पटरी से उतर चुका है। वर्तमान में इस पूरे ग्रामीण इलाके को शहर स्थित सब स्टेशन से जैसे-तैसे जोड़कर बिजली की खानापूर्ति की जा रही है, जिसके कारण चौबीस घंटे लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती का जानलेवा सिलसिला जारी है। रात-रात भर बिजली गुल रहने से बच्चों की पढ़ाई ठप है, किसानों के खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और व्यापार पूरी तरह चौपट हो चुका है। विभागीय कानों पर जूं न रेंगता देख, आखिरकार बिजली संकट से त्रस्त आक्रोशित ग्रामीणों ने सीधे कलेक्टर की चौखट पर दस्तक दी है। कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर ग्रामीणों ने विभाग और ठेकेदार के बीच चल रही साठगांठ की जांच करने तथा नवलपुर सब स्टेशन को तत्काल युद्ध स्तर पर शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली नहीं मिली, तो यह प्रशासनिक सुस्ती एक बड़े उग्र जन-आंदोलन का रूप ले लेगी।
सिर्फ 'रिमाइंडर' का ढोंग या ठेकेदार को संरक्षण? 06 महीने और खींचने की तैयारी
इस पूरे मामले में बिजली विभाग के जिम्मेदारों का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और संदेहास्पद है। कार्यपालन अभियंता जितेंद्र कुमार गुप्ता का कहना है कि ठेका कंपनी की लापरवाही से काम रुका है और उसे बार-बार रिमाइंडर (चेतावनी पत्र) भेजा जा रहा है, तथा काम पूरा होने में अभी 6 महीने का समय और लग सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि जो काम 4 साल में पूरा नहीं हुआ, वह अगले 6 महीने में कैसे पूरा होगा? विभाग आखिर ब्लैकलिस्टेड करने या ठेका निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है? केवल कागजी रिमाइंडर भेजने का यह ढोंग ठेका कंपनी को सीधे तौर पर अभयदान देने जैसा है। सूत्रों की मानें तो पेनाल्टी और कड़ी वैधानिक कार्रवाई से बचाने के लिए भीतर ही भीतर फाइलों को दबाया जा रहा है, जबकि जनता बूंद-बूंद बिजली और बुनियादी हक के लिए तरस रही है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस निरंकुश ठेका कंपनी और लापरवाह अफसरों पर क्या हंटर चलाता है।
