सत्ता के रसूख तले 'रेत के काले खेल' का भंडाफोड़,छग की फर्जी टीपी की आड़ में एमपी की नदियों का सीना चीर रहा माफिया,एसडीएम की रेड से मचा हड़कंप

सत्ता के रसूख तले 'रेत के काले खेल' का भंडाफोड़,छग की फर्जी टीपी की आड़ में एमपी की नदियों का सीना चीर रहा माफिया,एसडीएम की रेड से मचा हड़कंप


Junaid Khan - शहडोल। इलाक़े में खनिज संपदा की सरेआम लूट और वीआईपी नंबरों की आड़ में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के नेटवर्क को चुनौती देते हुए प्रशासनिक अमले ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैतपुर एसडीएम दीपक मडावी के नेतृत्व में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे बीरूहली और किसोरी गांव में घेराबंदी कर रेत के अवैध परिवहन में लिप्त दो भारी-भरकम हाईवा (क्रमांक MP 18 एच 5275 और MP 18 जेडीसी 3574) को जब्त किया गया। इस कार्रवाई ने सीधे तौर पर उस संगठित सिंडिकेट पर चोट की है जो कानून को अपनी जेब में रखकर घूमता है। एसडीएम ने संदेह के घेरे में आए दोनों वाहनों को बुढ़ार पुलिस के सुपुर्द कर मामला दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस औचक कार्रवाई से रेत माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले सफेदपोशों के खेमे में हड़कंप मच गया है। सत्ता और सियासत के रसूख का इस्तेमाल किस तरह सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए किया जा रहा है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तब सामने आया जब जब्त किए गए वाहनों में से एक हाईवा भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य जगन्नाथ शर्मा का निकला। शुरुआती जांच में जो सनसनीखेज तौर-तरीका सामने आया है, वह सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा करता है। माफिया द्वारा मध्य प्रदेश की ही जीवनदायिनी नदियों से अवैध रूप से रेत चोरी की जा रही है और उसे वैध दिखाने के लिए छत्तीसगढ़ के हरचुका व जनकपुर क्षेत्र की फर्जी या संदिग्ध ट्रांजिट पास (टीपी) का सहारा लिया जा रहा है। पकड़े गए वाहनों में जब टीपी के बार कोड को स्कैन करने की कोशिश की गई, तो वह फेल हो गया, जिसने इस पूरे अंतरराष्ट्रीय/अंतरराज्यीय फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी। हालांकि, संबंधित भाजपा नेता ने मामले को महज 'ओवरलोडिंग' का बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है, लेकिन बिना टीपी और बिना वैध दस्तावेजों के दौड़ रहे इन वाहनों ने यह साबित कर दिया है कि रसूखदारों के हौसले कितने बुलंद हैं। यह महज दो गाड़ियों की जब्ती का मामला नहीं है, बल्कि यह स्थानीय खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित सुस्ती को एक खुली चुनौती है कि आखिर नाक के नीचे इतना बड़ा सिंडिकेट कैसे फल-फूल रहा है? छत्तीसगढ़ की टीपी दिखाकर मध्य प्रदेश की नदियों को खोखला करने का यह खेल लंबे समय से जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने साफ किया है कि दूसरे वाहन मालिक की तलाश की जा रही है और इस पूरे रैकेट की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस राजनीतिक दबाव को दरकिनार कर इस रेत माफिया नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर पाता है, या फिर हर बार की तरह यह बड़ी कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी। रसूखदारों को इस मामले में बेनकाब करना अब प्रशासन के इकबाल की असली परीक्षा होगी।

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