कोतवाली और आरपीएफ की 'रहस्यमयी खामोशी' पर उठे सवाल; विनस होटल के सामने खंडहर बनी पुरानी लाइब्रेरी में बिखरी पड़ी हैं हजारों सिरिंज और प्रतिबंधित सीरप की बोतलें, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
Junaid Khan - शहडोल। कोयलांचल और आदिवासी बाहुल्य संभाग मुख्यालय शहडोल इन दिनों एक बेहद खौफनाक और आत्मघाती दौर से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि शहर का युवा किस कदर नशे के दलदल में धंस चुका है। यह कोई आम नशा नहीं, बल्कि सीधे मौत को दावत देने वाला 'मेडिकल नशा' है। रेलवे स्टेशन रोड स्थित फाटक के पास, मशहूर 'विनस होटल' के ठीक सामने बना रेलवे का एक खंडहर मकान जो कभी ज्ञान का मंदिर यानी 'लाइब्रेरी' हुआ करता था आज युवाओं के भविष्य को स्वाहा करने वाला सबसे बड़ा 'ब्लैक होल' बन चुका है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि इस खंडहर के भीतर और आसपास हजारों की तादात में इस्तेमाल किए जा चुके घातक इंजेक्शन (सिरिंज), प्रतिबंधित कफ सीरप की खाली बोतलें और थिनर जैसी जानलेवा चीजें बिखरी पड़ी हैं। यह मंजर चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि शहर के भीतर धड़ल्ले से चल रहे इस अवैध काले कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। थानों की 'नूराकुश्ती' और रेल प्रशासन की घोर लापरवाही। सबसे हैरान और विचलित करने वाली बात यह है कि यह पूरा इलाका दो-दो सुरक्षा एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। एक तरफ स्थानीय कोतवाली पुलिस की सीमा है, तो दूसरी तरफ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का पहरा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों ही विभागों की नाक के नीचे, दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक मौत का यह सामान खुलेआम बिक और खप रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यह दोनों थानों की कथित 'मिलीभगत' और 'मौन स्वीकृति' के बिना संभव ही नहीं है। हद तो यह है कि यह संपत्ति भारतीय रेलवे की है। रेलवे कॉलोनी से लेकर पुरानी बस्ती तक, रेल प्रशासन ने ऐसे दर्जनों खंडहर मकान लावारिस छोड़ रखे हैं। पूर्व में इन्हीं खंडहरों में मर्डर, बलात्कार, लूट और खूनी गैंगवार जैसी कई जघन्य वारदातें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन कुंभकर्णी नींद सोया रेल प्रशासन आज तक नहीं जागा। सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती, अब आर-पार के मूड में जनता एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन 'नशामुक्त समाज' के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी तरफ शहर के ऐन मरकज (केंद्र) में चल रहा यह सुसाइडल रैकेट पुलिस और जिला प्रशासन की साख को सीधी चुनौती दे रहा है। आखिर बिना पुख्ता नेटवर्क के इन युवाओं तक इतनी भारी मात्रा में मेडिकल नशे के इंजेक्शन और प्रतिबंधित दवाइयां कैसे पहुंच रही हैं? क्या ड्रग इंस्पेक्टर और स्थानीय पुलिस ने दवा दुकानों की आड़ में चल रहे इस अवैध खेल से अपनी आंखें मूंद ली हैं? बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन वाकई गंभीर है, तो ऐसे डेंजर जोन बन चुके सभी खंडहरों को तत्काल जमींदोज (बुलडोजर कार्रवाई) किया जाए या फिर उन्हें पूरी तरह सील कर ताला ठोंका जाए। यदि वक्त रहते इस पर कड़ा प्रहार नहीं किया गया, तो शहडोल का भविष्य पूरी तरह तबाह होना निश्चित है। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो के बाद भी जिम्मेदार कुर्सियां हिलती हैं या फिर 'कागजी कार्रवाई' का कोरम पूरा कर फाइलें दबा दी जाएंगी।
