प्रबंधन मौन, जनता त्रस्त: सेंट्रल बैंक की बुढ़ार रोड शाखा में 'लिंक फेल' का बोर्ड टांगकर जिम्मेदार गायब, क्या यही है बैंकिंग सुधार?
Junaid Khan - शहडोल। एक तरफ देश को डिजिटल बनाने और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के बुढ़ार रोड स्थित सेंट्रल बैंक शाखा में पिछले एक सप्ताह से पसरा सन्नाटा इन दावों की पोल खोल रहा है। यहाँ पिछले सात दिनों से मुख्य सर्वर ठप होने के चलते लिंक फेल बना हुआ है, जिसके कारण बैंकिंग कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। ग्रामीण और स्थानीय दूर-दराज के इलाकों से अपनी गाढ़ी कमाई की जमा-पूंजी निकालने और जरूरी लेन-देन के लिए आ रहे ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना देखिए कि बैंक ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए कैश काउंटर पर सीधे 'लिंक फेल' का बोर्ड टांग दिया है। सुबह से शाम तक लोग इस उम्मीद में काउंटरों के चक्कर काटते हैं कि शायद अब लिंक आ जाए, लेकिन अंत में उनके हाथ सिर्फ और सिर्फ घोर निराशा ही लगती है। बुधवार को भी दिनभर यही तमाशा चलता रहा और जनता बेबस खड़ी तमाशबीन बनी रही।
आईटी टीम का फेल्योर या प्रशासनिक उदासीनता? ग्राहकों के सब्र का बांध टूटा इस गंभीर संकट और तकनीकी गड़बड़ी को लेकर जब सेंट्रल बैंक के प्रबंधक शैलेंद्र जैन से बात की गई, तो उन्होंने बेहद रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि "सर्वर की समस्या से लिंक फेल हो रहा है, यह स्थिति पिछले कई दिनों से है। समस्या को दूर करने के लिए विशेष आईटी की टीम को बुलाकर यहाँ की खामियों को दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। हालांकि बुधवार को आईटी की टीम ने आंशिक सुधार किया था, लेकिन अब देखते हैं कि आगे क्या होता है।" बैंक प्रबंधन का यह 'देखते हैं क्या होता है' वाला गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें जनता की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं है। बीच-बीच में कुछ मिनटों के लिए लिंक आता जरूर है, लेकिन इससे पहले कि कोई काम हो, सर्वर फिर से बैठ जाता है। प्रबंधन और तकनीकी टीम का यह फेल्योर अब सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी और बैंकिंग लोकपाल के दावों को खुली चुनौती दे रहा है।
अवैध कमीशनखोरी और निजी दलालों की चांदी; क्या जानबूझकर पैदा किया गया है यह संकट?
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है जो व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े करता है। मुख्य बैंक शाखा का लिंक फेल होने की आड़ में आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय कुछ अवैध कियोस्क सेंटर, निजी दलाल और ऑनलाइन लेन-देन करने वाले तत्व चांदी काट रहे हैं। परेशान ग्राहकों को मजबूरी में इन केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है, जहाँ सर्वर चालू होने का दावा करके उनसे मनमाना अवैध कमीशन वसूला जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब मुख्य शाखा का सर्वर हफ्ते भर तक ठप रहता है, तो इन निजी ऑपरेटरों का नेटवर्क कैसे सुचारू रूप से काम कर लेता है? क्या इस तकनीकी खराबी के पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक लापरवाही या अंदरूनी साठगांठ है, ताकि जनता को परेशान कर इन अवैध रूप से अधिक चार्ज वसूलने वालों को फायदा पहुंचाया जा सके? जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेकर जांच बैठानी चाहिए, वरना जनता का इस पूरी बैंकिंग प्रणाली से भरोसा उठना तय है।
