खुद सीएमओ और जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय में पड़ रही भीषण और कड़कती गर्मी के बीच विगत दिनों 'दैनिक प्रदेश सत्ता' की खोजी टीम द्वारा व्यवस्था की पोल खोलती प्रमुखता से प्रकाशित खबर का बहुत बड़ा और व्यापक असर देखने को मिला है। पूर्व में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों और लगातार बढ़ते जन-आक्रोश का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और नगर पालिका अमले में हड़कंप मच गया। इसी कड़ी में नगर में गहराते जल संकट की गंभीरता को भांपते हुए नगर पालिका अध्यक्ष, जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एवं नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) निशांत सिंह ठाकुर तुरंत हरकत में आए और भारी दलबल के साथ सीधे जमीनी स्तर पर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया तथा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ऑन-द-स्पॉट कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उल्लेखनीय है कि 'दैनिक प्रदेश सत्ता' ने अपनी पिछली ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से यह प्रमुखता से उठाया था कि किस प्रकार नगर के घरोंला मोहल्ला, बरौनी होटल के पीछे, हनुमान मंदिर के पास, जयसवाल किराना स्टोर, गोले के घर, श्रीवास्तव के घर और अशोक पंडित वाली पूरी लाइन में पानी की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई थी। खबर में उजागर किया गया था कि कैसे जिला प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित विशेष जल संकट कंट्रोल रूम के बावजूद जमीनी स्तर पर नगर पालिका का फील्ड अमला पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ था, और पानी के वितरण में वीआईपी कल्चर तथा रसूखदारों को फायदा पहुंचाने का खेल चल रहा था। इस कड़वी सच्चाई के सामने आते ही प्रशासनिक हल्के में खलबली मच गई, जिसके परिणामस्वरूप आज खुद आला अधिकारी और जनसेवक जनता के द्वार पर खड़े नजर आए। जिला प्रशासन और नगर पालिका के नए अधिकारियों ने जिस संवेदनशीलता और गति के साथ इस गंभीर समस्या पर एक्शन लिया है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। निरीक्षण के इसी क्रम में नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि सिल्लू रजक एवं सभापति आशुतोष यादव भी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर मुस्तैद दिखे। जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रवासियों के बीच बैठकर उनकी एक-एक समस्याओं को अत्यंत धैर्यपूर्वक सुना। वार्ड वासियों ने भी खुलकर अपनी पुरानी पीड़ा अधिकारियों के समक्ष रखी और बताया कि किस तरह रसूखदारों के कारण आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के हिस्से सिर्फ सूखा नल और अधूरा नोज आ रहा था। इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जनप्रतिनिधियों और मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने संयुक्त रूप से आश्वस्त किया कि जल वितरण में किसी भी प्रकार का पक्षपात या मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी रसूखदार तत्व अवैध रूप से पानी की लाइनों में बाधा डाल रहे हैं या आम जनता के हक का पानी दबाकर बैठे हैं, उन्हें सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नगर पालिका की कड़ी कानूनी कार्रवाई और जब्ती का सामना करना पड़ेगा। पूर्व में 'दैनिक प्रदेश सत्ता' के तीखे सवालों के सामने नगर पालिका के फील्ड कर्मचारियों ने बेबसी जताते हुए स्वीकार किया था कि मुख्य आपूर्ति केंद्र (सर्फ़ा) से पानी बेहद लेट भेजे जाने और मुख्य टंकियां खाली रहने के कारण उन्हें मजबूरी में वाल्व (नोज) को आधा ही खोलना पड़ता था। इस तकनीकी और प्रशासनिक खामी को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ निशांत सिंह ठाकुर ने संबंधित तकनीकी अमले को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि मुख्य लाइनों में सप्लाई व्यवस्था को तत्काल सुचारू किया जाए। दौरे के अंत में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि नागरिकों को इस भीषण पेयजल संकट से त्वरित राहत दिलाने के लिए हर संभव और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। जहां पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचने में आंशिक तकनीकी देरी हो रही है, वहां नगर पालिका अपने स्तर पर बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क और पर्याप्त वैकल्पिक वॉटर टैंकरों की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करेगी। क्षेत्रवासियों ने 'दैनिक प्रदेश सत्ता' की निष्पक्ष पत्रकारिता और उसके बाद प्रशासन व नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा दिखाई गई इस त्वरित संवेदनशीलता, तत्परता और ग्राउंड एक्शन की खुले दिल से सराहना की है।
