जैतपुर के कमता BP पंप पर डीजल की कालाबाजारी और गुंडागर्दी की खबर का बड़ा असर

कुंभकर्णी नींद से जागा प्रशासन, अब रसूखदार संचालक को बचाने में जुटा पूरा सिंडिकेट


Junaid Khan - शहडोल। जैतपुर क्षेत्र के अन्नदाताओं के हक पर डाका डालकर ईंधन का अवैध काला बाजार चलाने वाले रसूखदारों के खिलाफ जब हमारे समाचार पत्र ने बेबाकी से खबर का प्रकाशन किया, तो पूरे प्रशासनिक अमले सहित मिलावटखोरों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। मामला जैतपुर तहसील के ग्राम कमता में संचालित भारत पेट्रोलियम (BP) के पेट्रोल पंप का है, जहां आम उपभोक्ताओं और छोटे किसानों को प्रताड़ित करना आम बात हो चुकी थी। पूर्व में लगी खबर का ऐसा जोरदार असर हुआ है कि अब तक आंखें मूंदे बैठा जिम्मेदार विभाग अपनी साख बचाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाने को मजबूर हो गया है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि रसूख और ऊंचे संपर्कों के दम पर इस पूरे अवैध तंत्र को दबाने और मामले पर लीपापोती करने के लिए पर्दे के पीछे से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का खेल भी शुरू हो चुका है। लेकिन हमारा समाचार पत्र इस भ्रष्ट प्रशासनिक सांठगांठ को खुली चुनौती देता है कि जब तक इस काले धंधे की तह तक जाकर दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, यह खोजी अभियान थमने वाला नहीं है।

22 मई की घटना का विवरण और पक्षपात का घिनौना चेहरा 

पूरे मामले की जमीनी हकीकत पर गौर करें तो गत 22 मई की शाम करीब पांच बजे स्थानीय जागरूक किसान प्रतीक सिंह अपनी खेती-किसानी के काम के लिए महज 20 लीटर डीजल लेने कमता स्थित इस बीपी पंप पर पहुंचे थे। वहां तैनात कर्मचारियों ने न सिर्फ नियमों का माखौल उड़ाते हुए उन्हें डीजल देने से साफ मना कर दिया, बल्कि बेहद अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें सरेआम अपमानित कर वहां से खदेड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहां पसीना बहाने वाले सच्चे किसान को चंद लीटर ईंधन के लिए दुत्कारा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ पंप संचालक मो. नादिर खान के सगे-संबंधियों और चहेतों को नियमों को ताक पर रखकर सरेआम बड़े-बड़े डिब्बों और ड्रमों में भरकर डीजल की खैरात बांटी जा रही थी। शिकायतकर्ता के पास इस पूरे पक्षपात और मनमानी का पुख्ता वीडियो साक्ष्य सुरक्षित है, जो इस पंप पर चल रही अवैध कालाबाजारी की जीती-जागती गवाही दे रहा है।

किसानों का संकट और अंतिम कार्रवाई की मांग

वर्तमान में बोनी का समय नजदीक आ चुका है और क्षेत्र के गरीब किसानों के लिए ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरणों हेतु डीजल की सख्त जरूरत है। ऐसे नाजुक समय में पंप संचालक का यह तानाशाही और भेदभावपूर्ण रवैया सीधे तौर पर ग्रामीण आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है, जिससे कई किसान रोजाना बैरंग लौटने को विवश हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह लड़ाई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM), कलेक्टर और जिला खाद्य अधिकारी की चौखट तक लिखित आवेदन और वीडियो फुटेज के साथ पहुंच चुकी है। पीड़ित पक्ष ने घटना वाले दिन की निष्पक्ष सीसीटीवी फुटेज खंगालने और दोषी संचालक के खिलाफ कड़ी वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस तेल माफिया और अवैध सिंडिकेट के सामने घुटने टेकता है या फिर अन्नदाताओं को उनका हक दिलाकर इस पंप का लाइसेंस निरस्त करने की हिम्मत दिखाता है। हमारी पैनी नजर इस कार्रवाई के एक-एक कदम पर बनी रहेगी।

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