साइबर सुरक्षा के दावों को ठेंगा,शहडोल की छात्रा को 'फेक प्रोफाइल' के जाल में फंसाकर उड़ा ले गया मुरैना का शातिर,जैतपुर पुलिस ने किया बरामद, पर मुख्य आरोपी अब भी फरार
Junaid Khan - शहडोल। जैतपुर सोशल मीडिया की चमचमाती आभासी दुनिया अब मासूम जिंदगियों और उनके परिवारों के लिए एक ऐसा खौफनाक दलदल बनती जा रही है, जिस पर न तो प्रशासन का कोई नियंत्रण है और न ही स्थानीय पुलिस का कोई खौफ। जिला मुख्यालय और ग्रामीण अंचलों में पैर पसारते डिजिटल अपराध की एक ऐसी ही दहला देने वाली बानगी जैतपुर क्षेत्र में सामने आई है, जिसने पुलिसिया चौकसी और साइबर सेल की सक्रियता की कलई खोलकर रख दी है। जैतपुर क्षेत्र की एक 18 वर्षीय प्रथम वर्ष की कॉलेज छात्रा को अपने जाल में फंसाकर एक शातिर ठग न केवल शहडोल की सीमा से बाहर ले गया, बल्कि उसने कानून व्यवस्था के मुंह पर भी करारा तमाचा जड़ा है। हालांकि, जैतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन ट्रेसिंग) के आधार पर युवती को मुरैना जिले के एक सुदूर गांव से दस्तयाब (बरामद) कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया है, लेकिन पुलिस की भनक लगते ही मुख्य आरोपी का मौके से फरार हो जाना सीधे तौर पर स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस की धरपकड़ रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पहचान बदलकर उतारा 'प्रेमजाल,पुलिस की नाक के नीचे से हुआ फरार
इस पूरे सनसनीखेज मामले में जो सबसे चौंकाने वाला और प्रशासन को चुनौती देने वाला पहलू है, वह है अपराधियों के हौसले और उनकी बेखौफ कार्यप्रणाली। पुलिस जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि ग्वालियर जिले के मोहसान का निवासी करण धनक, जो असल जिंदगी में केवल पुट्टी-पुताई (पेंटर) का मजदूरी कार्य करता था, उसने इंस्टाग्राम पर 'करण राजपूत' नाम से एक बेहद आलीशान और रसूखदार फर्जी आईडी (फेक प्रोफाइल) बना रखी थी। बड़े-बड़े बंगलों और महंगी गाड़ियों के सामने खिंचवाई गई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वह खुद को बेहद संपन्न और प्रभावशाली प्रदर्शित करता था। इसी फर्जी दिखावे और डिजिटल छलावे के दम पर उसने जैतपुर की छात्रा को अपने जाल में फंसाया। गत 6 जून को जब छात्रा अचानक लापता हुई, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में जैतपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्वालियर से चलकर एक युवक शहडोल के जैतपुर तक पहुंच जाता है, स्थानीय स्तर पर रेकी करता है, युवती को लेकर फरार हो जाता है और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगती।
अखबार का कड़ा सवाल,क्या केवल केस डायरी बंद करने के लिए बैठी है पुलिस?
यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया के 'फेक शिकारी' इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इस खबर से समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है कि सोशल मीडिया की हर चमक वास्तविक नहीं होती। अनजान चेहरों पर भरोसा करना और निजी जानकारियां साझा करना आत्मघाती साबित हो रहा है। लेकिन असली सवाल कानून के रखवालों से है—जब आरोपी का नाम, उसका हुलिया और उसका पूरा कच्चा-चिट्ठा सामने आ चुका है, तो पुलिस की नाक के नीचे से वह मुरैना में कैसे भाग निकला? क्या पुलिस केवल बरामदगी की औपचारिकता पूरी कर अपनी पीठ थपथपाना चाहती है, या फिर इस संगठित डिजिटल अपराध नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर इन फर्जी शिकारियों को ऐसा सबक सिखाएगी जो मिसाल बने? जैतपुर और मुरैना पुलिस की संयुक्त कार्यप्रणाली अब दांव पर है, और क्षेत्र की जनता इस शातिर अपराधी की सलाखों के पीछे पहुंचने का इंतजार कर रही है।
