जल संरक्षण अभियान के बीच तालाब पर कब्जे की कोशिश, शिकायत के बाद राजस्व अमला पहुंचा,काम रुकवाया

जल संरक्षण अभियान के बीच तालाब पर कब्जे की कोशिश, शिकायत के बाद राजस्व अमला पहुंचा,काम रुकवाया



Junaid Khan - शहडोल। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में सार्वजनिक जल स्रोतों पर अतिक्रमण और क्षति पहुंचाने के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला सोहागपुर तहसील के पटवारी हल्का कुदरी का है, जहां St. Aloysius Sr. Sec. School के सामने स्थित लगभग 30 वर्ष पुराने सार्वजनिक तालाब की भीट (मेड़) को जेसीबी मशीन से काटकर समतल किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह तालाब खसरा क्रमांक 493, 494, 495 एवं 507 के अंतर्गत आता है। इनमें कुछ भूमि शासकीय है तो कुछ पट्टे की बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा तालाब की भीट को काटकर भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी, जिससे तालाब के अस्तित्व और जल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन

मामले की जानकारी मिलने पर हमारी की टीम ने इसकी शिकायत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई। शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। जांच के दौरान तालाब की भीट काटने का कार्य पाया गया, जिसके बाद तत्काल काम रुकवा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो तालाब का स्वरूप प्रभावित हो सकता था और भविष्य में जल संरक्षण के प्रयासों को भी नुकसान पहुंचता। तालाब और उसकी भीट से छेड़छाड़ नियम विरुद्ध। राजस्व एवं जल संरक्षण से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी सार्वजनिक तालाब, उसके जलग्रहण क्षेत्र अथवा उसकी भीट (मेड़) को काटना, पाटना या क्षति पहुंचाना प्रतिबंधित है। तालाब की भीट वर्षा जल को रोकने और जल संग्रहण क्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार भीट को नुकसान पहुंचने से तालाब की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और लंबे समय में जल स्रोत समाप्त होने का खतरा बढ़ जाता है। जल गंगा संवर्द्धन अभियान के उद्देश्य पर सवाल। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा "जल गंगा संवर्द्धन अभियान" संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और संवर्द्धन करना है। यह 100 दिवसीय अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया जाता है।

अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों की साफ-सफाई, पुनरुद्धार, चेक डैमों की मरम्मत, जल संरचनाओं का संरक्षण तथा व्यापक वृक्षारोपण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। शासन लगातार आमजन से जल स्रोतों को बचाने और संरक्षित रखने की अपील कर रहा है। शहडोल देश के टॉप-10 जिलों में विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि भारत सरकार के "जल संचय जन भागीदारी अभियान" के अंतर्गत जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के कारण शहडोल जिला देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हो चुका है। ऐसे समय में यदि सार्वजनिक तालाबों की भीट काटकर अतिक्रमण या निर्माण की कोशिशें होती हैं तो यह जल संरक्षण के प्रयासों के विपरीत माना जाएगा। ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक जल स्रोत केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर हैं। ऐसे में तालाबों को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है। जल स्रोत बचेंगे तभी बचेगा भविष्य। जलवायु परिवर्तन और लगातार गिरते भूजल स्तर के दौर में तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जल स्रोत अमूल्य संपत्ति हैं। शासन जहां जल संरक्षण को लेकर व्यापक अभियान चला रहा है, वहीं समाज की भी जिम्मेदारी है कि इन जल स्रोतों की रक्षा करे। सार्वजनिक तालाबों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या क्षति केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। तालाब बचेंगे, तभी जल बचेगा और जल बचेगा तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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