सुरक्षा और सेहत की अनूठी मिसाल पेश,20 से अधिक नामी और जिम्मेदार चेहरों ने कंधे से कंधा मिलाकर संभाली कमान 'स्वास्थ्य है तो सुरक्षा है' के संकल्प के साथ एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र ने रचा नया इतिहास
Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर रामपुर बटुरा साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) सोहागपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रामपुर बटुरा ओपनकास्ट माइन (ओसीएम) ने इस बार केवल कोयला उत्पादन ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार और मानवीय सेवा की एक नई इबारत लिख दी है। औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की दिशा में एक बेहद अनुकरणीय कदम उठाते हुए प्रबंधन ने खदान परिसर में एक विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं सघन स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया। यह आयोजन केवल खदान के भीतर काम करने वाले जांबाज श्रमवीरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा लाभ आसपास के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को भी मिला। शिविर का मुख्य ध्येय कार्यस्थल पर जोखिमों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति सजग करना, उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाना और आम बीमारियों से समय रहते बचाव के अचूक उपाय बताना था। प्रबंधन के इस संवेदनशील और दूरदर्शी कदम की न केवल कर्मचारियों ने, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता और जिला प्रशासन ने भी मुक्त कंठ से सराहना की है।
इस ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी शिविर की सबसे खास और प्रेरक तस्वीर तब सामने आई, जब खान प्रबंधक (माइन मैनेजर) श्री अर्जुन पी. जोड़े ने किसी विशिष्ट अतिथि की तरह औपचारिकता निभाने के बजाय, स्वयं एक आम कर्मचारी की तरह आगे बढ़कर अपना ब्लड प्रेशर (रक्तचाप), शुगर और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य जांचें कराईं। एक शीर्ष अधिकारी को खुद इस तरह जांच कराते देख वहां मौजूद सैकड़ों कर्मचारियों और ग्रामीणों का हौसला दोगुना हो गया। खान प्रबंधक श्री जोड़े ने इस मौके पर अत्यंत प्रेरणादायी शब्दों में कहा कि, "सुरक्षित और स्वस्थ कर्मचारी ही किसी भी संस्थान की सबसे वास्तविक पूंजी और सबसे बड़ी ताकत होते हैं। खदान जैसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे कार्यस्थल पर 24 घंटे मुस्तैदी से काम करने वाले हमारे साथियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच एक अनिवार्य कवच है। इससे बीमारियों की समय रहते पहचान होती है और उनका सटीक उपचार संभव हो पाता है। हमारा प्रबंधन हमेशा अपने हर एक कर्मचारी के स्वास्थ्य और उनकी पूर्ण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता आया है और आगे भी देता रहेगा।" उन्होंने आगे जोड़ा कि जब नेतृत्व खुद आगे बढ़कर उदाहरण पेश करता है, तब पूरी टीम में सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक क्रांति आती है। इस महा-शिविर को धरातल पर सफल बनाने और इसे एक उत्सव का रूप देने में खदान के शीर्ष अधिकारियों से लेकर तकनीकी और प्रशासनिक अमले ने दिन-रात एक कर दिया। आयोजन की सफलता में खान सुरक्षा अधिकारी श्री राजेश दुबे साहब, श्री दिलीप त्रिपाठी, श्री स्वप्निल त्रिपाठी, श्री नीरज पांडेय, श्री अनिल सिंह साहब, श्री पदमेश तिवारी, श्री जितेंद्र पांडे, श्री पी.सी. राऊत साहब, इंजीनियर श्री लीलेश डेहरीया साहब, श्री हरि सिंह पनवार साहब, श्री राकेश कुमार गुप्ता, श्री आफताब आलम, सिकोट्ररी इंचार्ज श्री अखिलेशवर मिश्रा, फोरमैन श्री अशरफ अली, श्री मोहम्मद हारून, श्री रंजीत सिंह, कार्यालय अधीक्षक श्री मनोज अब्राहम, श्री जितेंद्र पाण्डेय, श्री प्रवेश जोगी, एमटीके प्रभारी श्री सुखलाल पटेल, श्री मनोज गर्ग, श्री जय कचेर, श्री आदित्य कुमार सोनी, श्री उमाकांत तिवारी, श्री शशिकांत मिश्रा, श्री बी.के. शुक्ला, श्री रमाशंकर द्विवेदी, श्री गोविंद पाल, श्री कमलेश साकेत, श्री मोहम्मद साहिद, श्री दीवाकर नाथ चौबे, श्री के.पी. गुप्ता, श्री रन्नू पनिका, श्री भारत सिंह, श्री मोहम्मद आलम, श्री उमेश कुमार दाहिया, श्री सुरेश सोनी एवं श्री के.डी. पाण्डेय का अत्यंत सराहनीय और ऊर्जावान योगदान रहा। इन सभी ज़िम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की अथक मेहनत ने इस शिविर को सोहागपुर क्षेत्र का सबसे व्यवस्थित और प्रभावी शिविर बना दिया। शिविर के दौरान आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की मदद से बीपी, ब्लड शुगर, गंभीर टीबी स्क्रीनिंग, SpO2 (ऑक्सीजन स्तर) एवं बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) की बारीक और निःशुल्क जांच की गई। मौके पर मुस्तैद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उपस्थित जनसमुदाय को केवल दवाइयां ही नहीं दीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के खानपान, नियमित व्यायाम और व्यक्तिगत व पर्यावरणीय स्वच्छता के महत्व पर बेहद सरल भाषा में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। प्रबंधन ने अंत में बेहद गौरवशाली शब्दों में दोहराया कि स्वास्थ्य है तो सुरक्षा है, सुरक्षा है तो समृद्धि है" के पवित्र संकल्प के साथ एसईसीएल की यह कल्याणकारी पहल भविष्य में भी पूरी निरंतरता के साथ जारी रहेगी। निश्चित रूप से, रामपुर बटुरा ओसीएम प्रबंधन द्वारा उठाया गया यह कदम औद्योगिक जगत और ग्रामीण विकास के बीच एक मजबूत पुल साबित हुआ है, जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है। स्वास्थ्य रक्षकों की देवतुल्य भूमिका,चिकित्सा टीम का हुआ विशेष सम्मान
इस शिविर को तकनीकी रूप से सफल बनाने और मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ने किसी 'देवदूत' की तरह काम किया। शिविर में अपनी सेवाएं देने वाली विशेष चिकित्सा टीम में,डॉक्टर सुषमा नागले (वरिष्ठ चिकित्सक) जिन्होंने हर मरीज की गंभीरता से जांच कर उचित परामर्श दिया। श्री अंबिका प्रसाद तिवारी (मुख्य फिजियोथेरेपिस्ट) जिन्होंने खदान कर्मियों को मस्कुलोस्केलेटल दर्द और पोस्चर से जुड़ी समस्याओं के लिए थेरेपी के गुर सिखाए। श्री अंशुमान गडिया (मेट्रो / नर्सिंग प्रभारी) जिन्होंने पूरे नर्सिंग मैनेजमेंट और जांच व्यवस्था को बेहद सुचारू रखा। श्री हरिनारायण कुशवाहा (फर्मासिस्ट) जिन्होंने निःशुल्क दवा वितरण का कार्य पूरी तत्परता से संभाला। श्री सुजीत जयसवाल (ड्राइवर) एवं श्री राजेंद्र कुमार (सहायक/हेल्पर) जिनकी बैकस्टेज मेहनत और मुस्तैदी से मेडिकल लॉजिस्टिक्स सुचारू रहा। पूरी टीम के इस अद्वितीय, निस्वार्थ और सेवाभावी योगदान की पूरे क्षेत्र में जमकर प्रशंसा की जा रही है।


