अकीदत और इंसानियत की मिसाल,मुहर्रम के मुकद्दस महीने में उमड़ा जनसैलाब,गुलामे अब्बास अलमदार लंगर कमेटी' ने कराया आम लंगर

अकीदत और इंसानियत की मिसाल,मुहर्रम के मुकद्दस महीने में उमड़ा जनसैलाब,गुलामे अब्बास अलमदार लंगर कमेटी' ने कराया आम लंगर 


Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी बुढ़ार रोड इस्लामी नए साल के आगाज़ के साथ ही मुहर्रम-उल-हराम का मुकद्दस महीना शुरू हो चुका है। मुहर्रम की पहली तारीख से लेकर 10 तारीख (यौम-ए-आशूरा) तक अकीदतमंद नवासे-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में शहर के कोने-कोने में तकरीर, सबील और लंगर का विशेष इंतजाम कर रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्र में आपसी सौहार्द और सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए बुढ़ार रोड स्थित जानू कॉम्प्लेक्स के सामने 'गुलामे अब्बास अलमदार लंगर कमेटी' की जानिब से बीते कल (22 जून 2026) को एक अजीम-ओ-शान लंगर और भंडारे का आयोजन किया गया। कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि शहादते इमाम हुसैन के नाम पर आयोजित इस भव्य लंगर की शुरुआत दोपहर ठीक 1:00 बजे हुई, जो देर शाम तक अनवरत (लगातार) जारी रही। एडवोकेट कलाम मोहम्मद ने किया शानदार मंच संचालन,बयां किया कर्बला का पैगाम इस पूरे गरिमामयी आयोजन के दौरान मंच संचालन की कमान एडवोकेट कलाम मोहम्मद ने बड़े ही प्रभावी और शानदार तरीके से संभाली। उन्होंने अपने मर्मस्पर्शी और ओजस्वी संबोधन से न सिर्फ वहां मौजूद लोगों को बांधे रखा, बल्कि मुहर्रम के इस मुकद्दस महीने के महत्व पर भी विस्तार से रोशनी डाली। एडवोकेट कलाम मोहम्मद ने लंगर कमेटी के इस बेहतरीन इंतजाम की सराहना करते हुए नवासे-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन की महान शहादत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपना सब कुछ कुर्बान कर दुनिया को मजलूमों का साथ देने, जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने और इंसानियत की हिफाजत करने का पैगाम दिया था। उनका यह संदेश किसी एक मजहब के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए प्रेरणा है। दोपहर से शाम तक लगी रही कतारें, खिदमत में जुटे रहे युवा। लंगर की शुरुआत दोपहर 1:00 बजे होते ही जानू कॉम्प्लेक्स के सामने अकीदतमंदों और राहगीरों का तांता लग गया। बुढ़ार-धनपुरी मुख्य मार्ग से गुजरने वाले हर शख्स को कमेटी के वॉलंटियर्स ने रोककर बड़े ही अदब और एहतराम के साथ लंगर (तबर्रुक) ग्रहण कराया। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद कमेटी के युवाओं का जोश देखने लायक था। कोई ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था संभाल रहा था, तो कोई कतारों को सुव्यवस्थित करने में जुटा था। दोपहर से लेकर शाम ढलने तक हजारों की संख्या में लोगों ने लंगर का लुत्फ उठाया और कमेटी के इस खिदमत-ए-खल्क (जनसेवा) के जज्बे को सराहा। मुहर्रम की 1 से 10 तारीख तक पूरा शहर इमाम हुसैन की याद में डूबा रहता है। भूखों को खाना खिलाना और प्यासों को पानी पिलाना ही कर्बला का असली पैगाम है, जिसे हम इस लंगर के जरिए आम कर रहे हैं। लंगर कमेटी सदस्य इस भव्य आयोजन को सफल बनाने वाले मुख्य नाम इस पूरे वृहद और भव्य आयोजन को अनुशासित व सफल बनाने में 'गुलामे अब्बास अलमदार लंगर कमेटी' की पूरी टीम ने दिन-रात एक कर दिया था। कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने और व्यवस्थाएं बनाए रखने में क्षेत्र के प्रमुख युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने अपनी अहम जिम्मेदारी निभाई। लंगर प्रोग्राम को सफल बनाने में मुख्य रूप से मोहम्मद नदीम खान, आसिफ अली, गुड्डू उस्ताद, अमन अली, अशफाक अली, नोमान अली, सैफ अली, अल्लू भाई, अनस खान, अरमान खान, समीर खान, फैज खान, मोहम्मद इकराम, जोहेब खान, सैयद खान, एडवोकेट कलाम मोहम्मद, फहीम खान, सोनू खान और पिंटू खान की बेहद अहम भूमिका रही। गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक। अखबार के प्रतिनिधियों से बात करते हुए स्थानीय नागरिकों ने कहा कि धनपुरी हमेशा से ही कौमी एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। इस मुकद्दस महीने में जगह-जगह हो रहे आयोजनों में सिर्फ एक समुदाय विशेष के लोग ही नहीं, बल्कि हर धर्म और वर्ग के राहगीरों ने तबर्रुक पाकर अपनी दुआएं दीं। देर शाम लंगर के समापन पर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी नगरवासियों, पुलिस प्रशासन और मीडिया कर्मियों का दिल से आभार व्यक्त किया।

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