अमझोर और दरौंडी में खनिज नियमों की सरेआम उड़ रही धज्जियां,धूल के गुबार से ग्रामीणों का जीना मुहाल, आक्रोशित जनता ने खड़े किए तीखे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के अमझोर और दरौंडी क्षेत्र में संचालित क्रशर इकाइयों द्वारा खनिज नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध उत्खनन और परिवहन ने अब एक बड़े जन-आक्रोश का रूप ले लिया है। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि 'विजय क्रशर' समेत क्षेत्र में सक्रिय अन्य क्रशर संचालक बिना किसी वैध रॉयल्टी के बड़े पैमाने पर गिट्टी का उत्खनन, भंडारण और अवैध परिवहन कर रहे हैं। इस काले कारोबार के कारण क्षेत्र से निकलने वाली गिट्टी को बिना किसी कानूनी दस्तावेज के गांव-गांव में खपाया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को हर दिन लाखों की चपत लग रही है। नियमों के मुताबिक उत्खनन और परिवहन के लिए अनिवार्य अनुमति और रॉयल्टी दस्तावेज होना बेहद जरूरी है, लेकिन यहाँ दर्जनों वाहन बिना किसी आवश्यक कागजात के खुलेआम सीना तानकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा अचानक औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) किया जाए, तो इस पूरे रैकेट की महा-अनियमितताएं और रसूखदारों के काले कारनामे सरेआम उजागर हो सकते हैं।
जर्जर सड़कें और बीमारी की मार,बार-बार की शिकायतों के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग
इस अवैध और अनियंत्रित कारोबार का सबसे खौफनाक खामियाजा स्थानीय निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है। क्षमता से कई गुना अधिक भारी वाहनों की चौबीसों घंटे होने वाली अनवरत आवाजाही के कारण अमझोर-दरौंडी क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। क्रशर से उड़ने वाली डस्ट और धूल के गुबार ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोग सांस की गंभीर बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा इस बदहाली और अवैध संचालन के खिलाफ कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रभावी कार्रवाई न होने से अब क्षेत्रीय नागरिकों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश पनप रहा है, जो कभी भी उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
जांच के नाम पर कब तक होगी खानापूर्ति? खनिज विभाग के दावों पर उठे सवाल
क्षेत्र की जनता अब आर-पार के मूड में है और उन्होंने जिला प्रशासन, खनिज विभाग सहित तमाम आला अधिकारियों से अमझोर, दरौंडी और विशेष रूप से विजय क्रशर के खिलाफ निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जांच के दौरान बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन या अन्य किसी भी प्रकार की वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार रसूखदारों पर तत्काल कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे सुलगते मामले पर जब खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य से बात की गई, तो उनका कहना था कि "अभी तक हमारे पास इस तरह की कोई लिखित शिकायत नहीं आई है, लेकिन मामला संज्ञान में आने के बाद हम इसकी गहन जांच करवाएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" अब देखना यह है कि खनिज विभाग केवल बयानों तक सीमित रहता है या फिर इन रसूखदार माफियाओं पर हंटर चलाकर कानून का इकबाल बुलंद करता है।
धधकते सवाल,जिसका जवाब जनता चाहती है
सवाल नं. 01: बिना वैध रॉयल्टी और बिना कागजात के सैकड़ों टन गिट्टी से लदे भारी वाहन खनिज विभाग के नाकों और उड़नदस्तों की नजरों से कैसे बच निकलते हैं?
सवाल नं. 02: प्रदूषण के तय मानकों का उल्लंघन कर ग्रामीणों को बीमारी की भट्टी में झोंकने वाले क्रशर संचालकों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन मौन क्यों है?
सवाल नं. 03: बार-बार की जन-शिकायतों के बाद भी क्या अधिकारी किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के कारण कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं?
