मानसून से पहले महा-लापरवाही,पेट्रोल पंप संचालक की मनमानी के आगे नतमस्तक हुआ नगरपालिका प्रशासन

शहर पर मंडराया जलभराव का संकट 

मॉडल रोड क्षेत्र में पुरानी पुलिया को मिट्टी से पाटा,नागरिकों की बार-बार की शिकायतों के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोया है जिम्मेदार अमला 


Junaid Khan - शहडोल। बरसात की दस्तक ठीक दहलीज पर है, लेकिन शहर के वीआईपी और रसूख वाले मॉडल रोड क्षेत्र में जलभराव की बरसों पुरानी गंभीर समस्या एक बार फिर स्थानीय नागरिकों की रातों की नींद उड़ा रही है। बीते दो वर्षों से बुढ़ार रोड स्थित मॉडल रोड और उसके आसपास के रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में मामूली बारिश के दौरान भी बेसमेंट, मकानों और मुख्य सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने की विभीषिका सामने आती रही है। इसके बावजूद, इस गंभीर जनसमस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान निकालने में स्थानीय नगरपालिका पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। प्रशासन की इस घोर अदूरदर्शिता, घुटने टेकू नीति और मानसून पूर्व तैयारियों के दावों की हवा इस बार मानसून आने से पहले ही निकल चुकी है। जनता अब सीधे सवाल उठा रही है कि करोड़ों के टैक्स वसूलने वाले अफसर आखिर किसके दबाव में मूकदर्शक बने बैठे हैं? रसूख के आगे कानून बौना: प्राकृतिक जल प्रवाह को रोककर खड़ी की जा रही बड़ी मुसीबत मामला सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती का नहीं, बल्कि रसूखदारों की सरेआम मनमानी का भी है। मॉडल रोड में नवनिर्मित पेट्रोल पंप के ठीक पास स्थित एक पुरानी और महत्वपूर्ण पुलिया के एक बड़े हिस्से को पेट्रोल पंप संचालक द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए मिट्टी और भारी भराव सामग्री (मुरम-मलबे) डालकर पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हालांकि पुलिया का दूसरा सिरा तकनीकी रूप से अभी खुला दिखाई दे रहा है, लेकिन जिस मुख्य दिशा से प्राकृतिक पानी का तेज बहाव आता है, वह क्षेत्र पूरी तरह मलबे से पट जाने के कारण प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता शत-प्रतिशत बाधित हो चुका है। सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह खड़ा होता है कि जब दिन-दहाड़े निर्माण कार्य के नाम पर इस सार्वजनिक पुलिया का मुंह बंद किया जा रहा था, तब जिला प्रशासन और नगरपालिका का अमला अपनी आँखें बंद करके क्यों बैठा था? क्या रसूखदारों को अवैध रूप से सार्वजनिक संपत्तियों और जलमार्गों से छेड़छाड़ करने की खुली छूट दे दी गई है? समय रहते नहीं चेते अफसर, तो डूबेंगे आशियाने और दुकानें स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में इस तानाशाही और प्रशासनिक साठगांठ को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। यदि समय रहते इस बंद की गई पुलिया को दोबारा पूरी तरह नहीं खोला गया और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इस वर्ष होने वाली पहली ही मूसलाधार बारिश शहर के इस हिस्से में भारी तबाही मचा सकती है। दर्जनों घरों, करोड़ों के टर्नओवर वाली दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बेसमेंट में पानी भरने की स्थिति बननी तय है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होगा। शहर की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और इस खुले भ्रष्टाचार व लापरवाही के खिलाफ सीधे उच्चाधिकारियों से लेकर सरकार तक को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। देखना यह है कि यह सोता हुआ प्रशासन जागता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

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