भ्रष्टाचार पर जीएम का महाप्रहार,जीएम ऑपरेशन कार्यालय का बाबू सोमेश्वर नारायण पाठक सस्पेंड,व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले भ्रष्टाचारियों में हड़कंप,पुलिसिया कार्रवाई की तैयारी

भ्रष्टाचार पर जीएम का महाप्रहार,जीएम ऑपरेशन कार्यालय का बाबू सोमेश्वर नारायण पाठक सस्पेंड,व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले भ्रष्टाचारियों में हड़कंप,पुलिसिया कार्रवाई की तैयारी


Junaid Khan - शहडोल। अनूपपुर कोयलांचल के जमुना-कोतमा क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को अपनी जागीर समझ चुके भ्रष्ट तंत्र पर महाप्रबंधक (जीएम) ने सीधे तौर पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। जीएम ऑपरेशन कार्यालय में अपनी कुर्सी की धमक दिखाकर अवैध कारनामों को अंजाम देने वाले बाबू सोमेश्वर नारायण पाठक के खिलाफ आई गंभीर शिकायतों पर प्रबंधन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। लगातार मिल रही भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र के महाप्रबंधक ने न केवल विभागीय जांच बैठाकर इस भ्रष्टाचारी बाबू के मंसूबों को नेस्तनाबूद किया, बल्कि व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस सफेदपोश कर्मचारी के विरुद्ध शिकायतकर्ता को सीधे पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की खुली छूट और सलाह भी दे डाली है। जीएम की इस बेबाक और कड़क कार्यशैली ने सीधे तौर पर उन तमाम सिंडिकेट्स और अवैध धंधेबाजों को चुनौती दे दी है, जो प्रशासनिक संरक्षण में भ्रष्टाचार की रोटियां सेक रहे थे।

प्रशासनिक रसूखदारों को खुली चुनौती,सुशासन की दिशा में जीएम का यह कदम साबित होगा मील का पत्थर,कोयलांचल में हड़कंप

शिकायतकर्ता द्वारा बाबू सोमेश्वर नारायण पाठक के विरुद्ध प्रस्तुत किए गए भ्रष्टाचार और घोर अनियमितताओं के पुख्ता दस्तावेजों ने प्रबंधन को भी हिलाकर रख दिया था। मामले की गंभीरता और प्रशासनिक साख को दांव पर लगते देख जीएम ने बिना किसी दबाव के तत्काल हस्तक्षेप किया, तथ्यों की बारीकी से समीक्षा की और दोषी कर्मचारी को उसकी सही जगह दिखाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे जमुना-कोतमा क्षेत्र के साथ-साथ शहडोल-अनूपपुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आम जनता और ईमानदार कर्मचारियों के बीच इस निष्पक्ष और त्वरित फैसले को लेकर भारी उत्साह है; लोगों का साफ कहना है कि कुर्सी की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल खेलने वालों को इसी तरह बेनकाब किया जाना जरूरी था। महाप्रबंधक की इस साहसिक पहल ने यह साबित कर दिया है कि सुशासन और पारदर्शिता के आड़े आने वाले किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम से जहां एक ओर ईमानदार अमले का मनोबल सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी ओर जनता का सिस्टम पर विश्वास और मजबूत हुआ है, जिसने क्षेत्र में अवैध साम्राज्य चलाने वालों की चूलें हिलाकर रख दी हैं।

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