प्रशासन को खुली चुनौती,इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग पर मची अफरा-तफरी,भारी पुलिस बल तैनात,नगर पालिका ने जताया 'साजिश' का अंदेशा, जांच की सुई घूमी
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग पर रविवार को उस समय भारी तनाव और अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया, जब प्रशासन के महत्वाकांक्षी सड़क चौड़ीकरण सह अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक बड़ा और दर्दनाक हादसा घटित हो गया। नगर पालिका की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच एक जर्जर मकान का भारी-भरकम मलबा अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी जद में आने से स्थानीय निवासी सीताराम गुप्ता (45 वर्ष) मलबे के नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तत्काल बाद घटना स्थल पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते वहां मौजूद जनता का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने मौके पर खड़ी नगर पालिका की जेसीबी मशीन पर सीधा हमला बोलते हुए पथराव शुरू कर दिया, जिससे वाहन के शीशे टूट गए और सरकारी मशीनरी को भारी क्षति पहुंची। इस अप्रत्याशित हिंसक झड़प और हंगामे के चलते प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया, जिसके बाद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चा संभालकर स्थिति को बमुश्किल नियंत्रित किया।
लाइफ सपोर्ट' पर जिंदगी, मेडिकल कॉलेज में जंग लड़ रहा घायल,परिजनों के गुस्से से सहमा अमला
मलबे की चपेट में आने से गंभीर रूप से लहूलुहान हुए सीताराम गुप्ता को आनन-फानन में जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत शहडोल मेडिकल कॉलेज के आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) में शिफ्ट कर दिया है। सिर और आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आने के कारण वर्तमान में मरीज की हालत चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इधर, हादसे की खबर फैलते ही इंदिरा चौक इलाके में भारी जन-आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों का आरोप था कि प्रशासनिक अमला बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के इतनी संवेदनशील कार्रवाई को अंजाम दे रहा था। पथराव और हिंसक घेराव के बीच नगर पालिका के कर्मचारियों और अधिकारियों को मौके से पीछे हटना पड़ा, जिससे कुछ समय के लिए विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गया।
नगर पालिका का बड़ा दावा,लाउडस्पीकर से मुनादी और चेतावनियों के बावजूद जानबूझकर सामने आया शख्स
इस पूरे खूनी घटनाक्रम पर अब नगर पालिका प्रशासन और मैदानी कर्मचारियों ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर पक्ष सामने रखा है। मौके पर मौजूद अमले का साफ कहना है कि इस महाअभियान को शुरू करने से पहले प्रभावित क्षेत्र में बकायदा नोटिस तामील कराए गए थे और अलाउंस गाड़ी (लाउडस्पीकर) के जरिए लगातार मुनादी कर लोगों को सचेत किया जा रहा था। जब मौके पर कई भारी-भरकम जेसीबी मशीनें लगातार काम कर रही थीं और हजारों की भीड़ वहां मौजूद थी, तब अचानक घायल व्यक्ति का मशीनों के बिल्कुल नजदीक आ जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों के मुताबिक,हजारों की पब्लिक वहां शांतिपूर्वक खड़ी थी, किसी को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन यह शख्स अचानक और अप्रत्याशित रूप से काम को प्रभावित करने या रोकने की नीयत से बीच में आ गया।" प्रशासन अब इसे महकमे को बदनाम करने या शहर के चौड़ीकरण के इस बेहतर कार्य को बाधित करने की एक सोची-समझी 'साजिश' के चश्मे से भी देख रहा है।
वीडियो फुटेज खंगाल रही पुलिस,साजिश' या 'लापरवाही'? उच्च स्तरीय जांच शुरू
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए शहडोल पुलिस और प्रशासनिक आलाधिकारियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस प्रशासन अब मौके पर बनाए गए वीडियो, स्थानीय सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और चश्मदीदों के बयानों को खंगालने में जुट गई है, ताकि यह साफ हो सके कि यह महज एक आकस्मिक हादसा था, नगर पालिका की लापरवाही थी, या फिर प्रशासनिक कार्रवाई को जबरन रोकने के लिए रचा गया कोई सुनियोजित ड्रामा। फिलहाल, जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शहर के विकास और सुगम यातायात के लिए शुरू किया गया यह अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है, लेकिन इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
