प्रशासन ने थमाया आमंत्रण पत्र,पर सफर छोड़ दिया ‘चमत्कार’ पर,70-80 साल के बुजुर्ग सेनानियों को जनरल बोगी में धकेलने की तैयारी?
Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी 26 जून 1975 के काले आपातकाल के खिलाफ सीना तानकर खड़े होने वाले और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जिला शहडोल और धनपुरी के लोकतंत्र सेनानी आज खुद की गरिमा और सम्मान के लिए रेल पटरियों पर बेबस नजर आ रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन द्वारा आगामी 26 जून 2026 को वल्लभ भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय "लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह" में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इन सेनानियों का सम्मान किया जाना तय हुआ है। जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट शहडोल द्वारा बीते 18 जून को बाकायदा पत्र जारी कर इन बुजुर्ग सेनानियों को भोपाल पहुंचने का न्योता तो दे दिया गया, लेकिन कागजी फरमान जारी करने के बाद प्रशासन अपनी जिम्मेदारी भूलकर गहरी नींद में सो गया। कड़वी हकीकत यह है कि शहडोल-कटनी-भोपाल रूट पर चलने वाली किसी भी ट्रेन में इन बुजुर्गों को रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है। वेटिंग लिस्ट सैकड़ों पार है। अब सवाल यह उठता है कि 70 से 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके ये वयोवृद्ध सेनानी बिना किसी आरक्षित सीट के, खचाखच भरी जनरल बोगियों में 8 से 10 घंटे का जानलेवा सफर कैसे तय करेंगे? यदि समय रहते शासन-प्रशासन और रेलवे ने इनके लिए विशेष कोटा या आपातकालीन बोगी की व्यवस्था नहीं की, तो मुख्यमंत्री का यह महत्वाकांक्षी सम्मान समारोह सिर्फ एक कागजी 'चमत्कार' और औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
लापरवाह अमले के बीच कोतवाली पुलिस बनी ढाल,बुजुर्गों को ढांढस बंधाकर पेश की इंसानियत की मिसाल
इस पूरे प्रशासनिक गतिरोध और अव्यवस्था के बीच जहां रेलवे और स्थानीय सिविल प्रशासन ने मौन साध रखा है, वहीं शहडोल कोतवाली पुलिस का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आया है। सफर की अनिश्चितता और रिजर्वेशन न मिलने से परेशान, हताश और कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे इन बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों की सुध जब किसी ने नहीं ली, तब कोतवाली पुलिस के जांबाज अधिकारियों और जवानों ने आगे आकर मोर्चा संभाला। कोतवाली पुलिस ने न केवल इन वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और उनके सम्मान का पूरा ख्याल रखा, बल्कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखते हुए बुजुर्गों को हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया। कोतवाली पुलिस की इस सहृदयता और त्वरित तत्परता ने साबित कर दिया कि खाकी सिर्फ डंडा चलाना नहीं, बल्कि समाज के बुजुर्गों और देश के गौरव की रक्षा करना भी जानती है। जहां एक तरफ रेल विभाग और जिला प्रशासन इन सेनानियों को अधर में छोड़कर मूकदर्शक बना हुआ है, वहीं कोतवाली पुलिस की यह मुस्तैदी और मानवीय कार्यप्रणाली पूरे संभाग में तारीफ बटोर रही है। अब देखना यह है कि कोतवाली पुलिस के इस जज्बे से सीख लेकर क्या प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करते हैं, या फिर लोकतंत्र के इन नायकों का सम्मान सिर्फ फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा?
