बेखौफ अपराधी, लाचार व्यवस्था, रायजादा पेट्रोल पंप पर दबंगई का नंगा नाच, क्या पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है?
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के हृदय स्थल बुढ़ार रोड पर स्थित रायजादा पेट्रोल पंप पर घटित सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर स्थानीय पुलिसिंग और अपराधियों में कानून के खौफ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा नियमों का पालन करना और बोतल में ईंधन देने से मना करना एक गरीब कर्मचारी के लिए काल बन गया। अपराधी इस कदर बेखौफ हैं कि वे न सिर्फ प्रतिबंधित तरीके से बोतल में पेट्रोल देने का दबाव बनाते हैं, बल्कि मना करने पर सरेआम कानून व्यवस्था को अपनी जेब में रखकर हिंसक तांडव मचाते हैं। वारदात के दौरान जिस तरह मुख्य आरोपी रहीम इरानी ने फोन कर अपने एक अन्य नकाबपोश गुर्गे को बुलाया और बीच सड़क पर कानून की धज्जियां उड़ाईं, वह सीधे तौर पर शहडोल पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और गश्त दावों को खुली चुनौती है। यह केवल एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि शहडोल की शांति व्यवस्था को बिगाड़ने वाले उन असामाजिक तत्वों का दुस्साहस है जो आम नागरिकों की जान को हथेली पर लेकर घूम रहे हैं। पीड़ित विक्रम कैथवास (33), जो पुरानी बस्ती वार्ड नंबर 39 का निवासी है, उसने जब शासन के नियमों का हवाला देते हुए आरोपी रहीम इरानी (निवासी सौखी मोहल्ला, इरानी बाड़ा) को बोतल में पेट्रोल देने से इंकार किया, तो आरोपी ने मां-बहन की अश्लील गालियां देते हुए उसे जमीन पर पटक दिया और लात-घूंसों से लहूलुहान कर दिया। हद तो तब हो गई जब बीच-बचाव करने आए अन्य कर्मचारियों जोगेन्दर सिंह, राजेश शुक्ला और राहुल यादव के सामने ही आरोपी ने फोन कर अपने एक और काले लोअर-टीशर्ट पहने बाइक सवार साथी को बुला लिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर पीड़ित को न सिर्फ बुरी तरह पीटा—जिससे उसके चेहरे, गर्दन, पीठ और हाथ की उंगलियों में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं बल्कि जाते-जाते यह खुली चुनौती भी दे गए कि 'रास्ते में चाकू घोंप कर जान से मार देंगे'। अब सबसे बड़ा सवाल कोतवाली पुलिस और जिले के आला अधिकारियों के सामने खड़ा है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 296(b), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज कर लेना ही क्या इतिश्री है? सरेआम पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थान पर ऐसी गुंडागर्दी यह बताती है कि शहर के भीतर कुछ इलाकों में अवैध गतिविधियों और दबंगई को अंजाम देने वालों के हौसले बुलंद हैं। क्या पेट्रोल पंपों पर कर्मचारियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है? यदि कोई जागरूक कर्मचारी शासन के अवैध रूप से बोतल में पेट्रोल न देने के नियम का कड़ाई से पालन करता है, तो क्या उसे बदले में जान से मारने की धमकी और खून से लथपथ चेहरा मिलेगा? प्रशासन को अब केवल कागजी कार्रवाई से ऊपर उठकर इन अपराधियों के आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क पर ऐसा प्रहार करना होगा, ताकि भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने की जुर्रत न कर सके।
