साहित्यकारों का महाकुंभ,उमरिया में शारिब पूर्वांचली के जिला समन्वयक बनने पर भव्य सम्मान समारोह व काव्य गोष्ठी संपन्न

साहित्यकारों का महाकुंभ,उमरिया में शारिब पूर्वांचली के जिला समन्वयक बनने पर भव्य सम्मान समारोह व काव्य गोष्ठी संपन्न


Junaid Khan - शहडोल। उमरिया मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद (संस्कृति विभाग) द्वारा जाने-माने शायर शारिब पूर्वांचली को उमरिया जिले का जिला समन्वयक मनोनीत किए जाने पर समूचे साहित्यिक जगत में हर्ष की लहर है। इसी उपलक्ष्य में 'वातायन' एवं अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं के तत्वावधान में दिनांक 28 जून को स्थानीय 'वीणा पैलेस' में एक भव्य साहित्यकार सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी आयोजन में उमरिया जिले के हिंदी, उर्दू और बघेली भाषा के सभी रचनाकारों का भव्य सम्मान किया गया। पुष्प माला और डायरी-पेन से अतिथियों का भावभीना स्वागत कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त जिला समन्वयक शारिब पूर्वांचली ने अपनी परंपरा और संस्कृति का निर्वहन करते हुए मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि पूर्व उर्दू समन्वयक श्री कुलदीप कुमार जी, मार्गदर्शक श्री अनिल मिश्रा जी, वातायन संस्था के अध्यक्ष श्री जगदीश पयासी जी एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री शेख धीरज जी सहित उपस्थित सभी वरिष्ठ साहित्यकारों का पुष्प माला पहनाकर भावभीना स्वागत किया। स्वागत की इस बेला में शारिब जी द्वारा सभी सम्मानित अतिथियों को साहित्य का सच्चा प्रतीक 'डायरी और पेन' भेंट स्वरूप प्रदान किया गया। इस विचारशील उपहार को पाकर सभी रचनाकार गद्गद हो उठे। गरिमामयी उपस्थिति और कुशल मार्गदर्शन यह भव्य आयोजन श्री अनिल मिश्रा जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उर्दू समन्वयक श्री कुलदीप कुमार जी उपस्थित रहे, जिन्होंने नए दायित्वों के लिए शारिब पूर्वांचली को शुभकामनाएं दीं। वहीं, वातायन संस्था के अध्यक्ष श्री जगदीश पयासी जी की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री शेख धीरज जी ने की, जबकि मंच का सफल और जीवंत संचालन श्री भूपेंद्र त्रिपाठी जी द्वारा किया गया। काव्य गोष्ठी, रचनाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता काव्य गोष्ठी में न केवल स्थानीय बल्कि कटनी जिले से आए आमंत्रित कवियों ने भी अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुतियां इस प्रकार रहीं,कटनी से आए हास्य कवि श्री शरद जयसवाल जी ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को लोटपोट किया, वहीं कटनी के ही प्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री चंद्र किशोर चंदन जी ने अपनी मखमली गज़लों से खूब वाहवाही लूटी। श्रीमती रंजना गौतम जी ने अपनी उच्च कोटि की ग़ज़लों से पूरे पंडाल में समां बांध दिया। मुख्य कवि श्री राजकुमार महोबिया जी ने अपने शानदार 'नवगीत' की प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया। श्री रामलखन सिंह चौहान साहब ने जहाँ अपने विशेष तेवर वाले अंदाज़ से पंडाल को वीर रस से ओत-प्रोत कर दिया, वहीं श्री शिवानंद पटेल जी की नसीहतों से भरी भावुक प्रस्तुति ने वहाँ मौजूद सभी श्रोताओं की आँखों में अश्रु का प्रवाह कर दिया। श्री तन्मय मिश्रा जी ने अपनी बेहतरीन ग़ज़ल लेखनी से वहाँ मौजूद सभी साहित्यकारों और श्रोताओं को आश्चर्यचकित कर दिया। नए गज़लकार श्री आयुष सोनी जी और श्री अजय द्विवेदी जी ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।

आयोजन सहयोग एवं विशेष प्रस्तुतियाँ कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने, व्यवस्था संभालने के साथ-साथ अपनी बेहतरीन कलात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को लोटपोट और आनंदित करने में इस टीम का विशेष योगदान रहा। वीडियो प्रभारी श्री योगेश पाण्डेय जी कैमरा प्रभारी: श्री शिवांश गहरवार जी भोजन प्रभारी: श्री मनोज सेन जी शारिब पूर्वांचली की ऐतिहासिक सौगात: पूरे मध्य प्रदेश के साहित्यकारों के लिए निःशुल्क टाइपिंग का महा-ऐलान अपनी इस नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नवनियुक्त जिला समन्वयक शारिब पूर्वांचली ने मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति परिषद (संस्कृति विभाग) के साथ-साथ विश्व विख्यात शायरा एवं माननीय निदेशिका डॉक्टर नुसरत मेंहदी जी का सहृदय आभार और धन्यवाद ज्ञापित किया। शारिब पूर्वांचली ने उमरिया जिले सहित पूरे प्रदेश के साहित्यकारों से उर्दू लेखन और उर्दू साहित्य के उत्थान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। साहित्य को वैश्विक और डिजिटल मंच पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने एक बेहद अनुकरणीय और ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि यदि मध्य प्रदेश का कोई भी साहित्यकार अपनी रचनाओं को पुस्तक स्वरूप या प्रकाशन के लिए देना चाहता है, तो उसकी 'Word Format' में संपूर्ण टाइपिंग शारिब स्वयं निःशुल्क (Free) करके देंगे। शारिब पूर्वांचली की इस राज्यस्तरीय, निस्वार्थ और अनूठी पहल की सभी उपस्थित साहित्यकारों, प्रबुद्धजनों और प्रबुद्ध समाज ने मुक्तकंठ से सराहना की है। यह कार्यक्रम उमरिया के सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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